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नशा माफिया परिवार की ‘करोड़ों की कमाई’ पर पुलिस की चोट, संपत्ति हुई फ्रीज

भदरोआ (कांगड़ा) । राजवीर दीक्षित

(Police strike at the ‘multi-crore earnings’ of a drug mafia family; assets frozen) हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को पुलिस जिला नूरपुर ने अब और तेज कर दिया है। पुलिस ने नशा तस्करी के नेटवर्क पर सिर्फ कानूनी कार्रवाई करने के बजाय इसके आर्थिक नेटवर्क पर भी सीधा प्रहार शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पुलिस थाना इंदौरा के अंतर्गत वर्ष 2017 में दर्ज एनडीपीएस अधिनियम के एक मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। गांव छन्नी निवासी दलवीरो और उसके परिवार से जुड़ी तीन संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया है। इन तीनों संपत्तियों की कुल कीमत 1 करोड़ 1 लाख 55 हजार 718 रुपये बताई गई है। पुलिस की इस कार्रवाई से साफ है कि नशे के कारोबार से जुड़े लोगों की संपत्ति और आर्थिक गतिविधियां भी अब जांच और कार्रवाई के दायरे में हैं।

मां-बेटा-बेटी की संपत्ति पर कार्रवाई, पुलिस ने फ्रीज की करोड़ों की प्रॉपर्टी

दलवीरो और उसके परिवार की संपत्तियों पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धर्म चंद वर्मा के मुताबिक, परिवार की कई संपत्तियों को फिलहाल अस्थायी रूप से फ्रीज किया गया है।

कार्रवाई में 61 लाख 96 हजार 561 रुपये की कोठी, बेटे मिथुन उर्फ छप्पर से जुड़ी 32 लाख 60 हजार 950 रुपये की कोठी, फर्नीचर और घरेलू सामान तथा बेटी घरो देवी के नाम दर्ज 6 लाख 98 हजार 207 रुपये की कार शामिल है। कुल मिलाकर संपत्तियों का मूल्य एक करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। अब पुलिस की जांच सिर्फ संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उस पैसे तक पहुंचने की कोशिश है जिससे ये संपत्तियां बनाई या खरीदी गईं।

मां को 10 साल की जेल, बेटे पर 14 केस… अब संपत्ति का भी होगा हिसाब

दलवीरो को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद 1 अप्रैल 2025 को 10 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दलवीरो के खिलाफ कुल पांच मामले दर्ज हैं। वहीं उसके बेटे मिथुन उर्फ छप्पर के खिलाफ 14 विभिन्न मामले दर्ज होने की बात पुलिस ने बताई है।

मामले में अब पुलिस ने संपत्तियों की जांच का दायरा भी बढ़ा दिया है। अधिकारियों ने संपत्तियों से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए राजस्व विभाग के रिकॉर्ड, वाहनों के रजिस्ट्रेशन, आयकर संबंधी दस्तावेज और PWD द्वारा किए गए मूल्यांकन सहित कई सरकारी रिकॉर्ड खंगाले हैं।

जांच का सबसे अहम पहलू संपत्ति की कमाई का स्रोत है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संपत्तियां वास्तव में वैध आमदनी से खरीदी या बनाई गई थीं या फिर नशे के कथित कारोबार से हासिल धन को इनमें लगाया गया था। इस जांच के जरिए पुलिस आय और संपत्ति के बीच संबंध की भी पड़ताल कर रही है।

ड्रग्स के बाद अब ‘काली कमाई’ की जांच, परिवार-सहयोगियों की प्रॉपर्टी भी खंगालेगी पुलिस

नूरपुर पुलिस ने नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई का दायरा और बढ़ा दिया है। एएसपी धर्म चंद वर्मा ने स्पष्ट किया कि अब सिर्फ नशीले पदार्थों की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। पुलिस तस्करी से जुड़े पैसों के पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। बैंक खातों में हुए लेनदेन, संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और परिवार व सहयोगियों के नाम पर बनाई गई संपत्तियों की भी जांच की जा रही है।

पुलिस की नजर अब नशे की खेप के साथ-साथ उस पैसे पर भी है, जो इस अवैध कारोबार से कमाया गया। अधिकारियों के मुताबिक यदि नशे से अर्जित रकम को संपत्ति या अन्य वैध माध्यमों में बदलने के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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