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रुपए पर RBI का शिकंजा, डॉलर विंडो से वार!

मुंबई। टारगेट न्यूज नेटवर्क 
(RBI tightens grip on the rupee; strikes via the dollar window!) डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होते रुपए को संभालने और विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कई कदम उठाए हैं। सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर संबंधी जरूरतें पूरी करने के लिए विशेष डॉलर विंडो शुरू करने और फॉरेक्स डेरिवेटिव ट्रेडिंग के नियम सख्त करने की योजना के जरिए बाजार में डॉलर की मांग और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इन उपायों से रुपए को कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, मजबूत डॉलर और विदेशी निवेश में सुस्ती के कारण रुपए पर दबाव बना रह सकता है।

97 के पार जाने से रोकने की चुनौती

रिपोर्ट के मुताबिक, 9 अक्टूबर को रुपया डॉलर के मुकाबले 96.73 पर बंद हुआ था। यह मई में दर्ज 96.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब है। वर्ष 2026 में अब तक रुपया 7 प्रतिशत से अधिक कमजोर हो चुका है।

कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता और डॉलर की मजबूत मांग से रुपये पर दबाव बढ़ा है। बाजार में आशंका है कि रुपया 97 प्रति डॉलर के स्तर के करीब पहुंचने पर कंपनियों की डॉलर खरीदारी और सट्टेबाजी बढ़ सकती है।

तेल कंपनियों को मिलेगी स्पेशल डॉलर विंडो

भारत के कुल आयात में कच्चे तेल की बड़ी हिस्सेदारी है। तेल कंपनियों को रोजाना बड़ी मात्रा में डॉलर की जरूरत पड़ती है। विशेष डॉलर विंडो के जरिए उनकी जरूरतें सीधे पूरी करने से खुले विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

इस कदम का मकसद बाजार में अचानक बढ़ने वाली डॉलर की मांग को नियंत्रित करना और रुपए में तेज उतार-चढ़ाव पर लगाम लगाना है।

फॉरेक्स ट्रेडिंग के नियम होंगे सख्त

RBI के बताए गए उपायों में विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव्स से जुड़े नियमों में बदलाव भी शामिल हैं। इनका उद्देश्य वास्तविक कारोबार से जुड़े जोखिमों की हेजिंग को बढ़ावा देना और बिना वास्तविक विदेशी मुद्रा लेन-देन के बड़े सट्टेबाजी वाले सौदों को सीमित करना है।

प्रमुख प्रस्तावित बदलाव इस प्रकार हैं:

  • ट्रेडिंग की सीमा में कटौती: वास्तविक विदेशी मुद्रा जोखिम या दस्तावेजों के बिना किए जाने वाले सौदों की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर करने की बात कही गई है।

  • रद्द सौदों पर रोक: एक बार रद्द किए गए फॉरेक्स डेरिवेटिव सौदे को दोबारा बुक करने की अनुमति सीमित की जाएगी। मैच्योरिटी पर रोलओवर के नियम अलग रहेंगे।

  • बड़े सौदों पर अतिरिक्त सुरक्षा: 20 मिलियन डॉलर से बड़े सौदों के लिए 20 प्रतिशत फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व रखने का प्रावधान बताया गया है।

  • दोहरी हेजिंग पर लगाम: कारोबारियों को यह घोषणा करनी होगी कि एक ही वास्तविक लेन-देन के लिए दो अलग-अलग बैंकों से हेजिंग नहीं ली गई है।

इन उपायों का उद्देश्य बाजार में अनुशासन बढ़ाना और बिना वास्तविक कारोबारी जरूरत के जोखिम लेने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना है।

विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट

रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर के शुरुआती रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ गया। 25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में भंडार 757.46 अरब डॉलर और 2 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में 734.61 अरब डॉलर बताया गया।

दो सप्ताह में करीब 31.3 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज होने से बाजार में रुपए की स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ी है। हालांकि, विदेशी मुद्रा भंडार में बदलाव के पीछे कई कारण हो सकते हैं और केवल गिरावट से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पूरी रकम बाजार में हस्तक्षेप पर खर्च हुई है।

₹25,000 करोड़ के बॉन्ड बेचेगा RBI

बाजार में अतिरिक्त नकदी घटाने के लिए RBI ने 13 अक्टूबर को ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के तहत 25,000 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड बेचने की योजना भी घोषित की है। बॉन्ड बेचने से बैंकों के पास मौजूद नकदी घट सकती है और बॉन्ड यील्ड पर ऊपर की ओर दबाव पड़ सकता है।

इसके अलावा, 16 अक्टूबर से बैंकों को अपने नकद आरक्षित अनुपात (CRR) का कम से कम 99 प्रतिशत हिस्सा रोजाना बनाए रखना होगा, जबकि पहले दैनिक रखरखाव की सीमा 90 प्रतिशत थी। मुख्य CRR दर में बदलाव किए बिना यह कदम बैंकों की नकदी प्रबंधन व्यवस्था को सख्त करेगा।

आम आदमी पर क्या होगा असर?

रुपए में कमजोरी का असर विदेश से आयात होने वाले सामान पर पड़ सकता है। कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित उत्पाद महंगे होने से परिवहन लागत और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। विदेश में पढ़ाई या यात्रा करने वालों को भी डॉलर खरीदने के लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।

वहीं, बाजार में नकदी कम होने और बैंकों की हेजिंग लागत बढ़ने से कारोबारी ऋण और वित्तीय सेवाओं की लागत पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव बाजार की परिस्थितियों और बैंकों की नीतियों पर निर्भर करेगा।

RBI की चुनौती साफ है: रुपए में तेज गिरावट और बाजार की अस्थिरता को नियंत्रित करना, बिना वित्तीय बाजार में अनावश्यक दबाव पैदा किए। इन कदमों से कितनी राहत मिलेगी, यह डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश के रुझान पर निर्भर करेगा।

नोट: यह पुनर्लेखन आपके दिए गए आंकड़ों और दावों पर आधारित है। RBI के नियमों, डॉलर विंडो और बाजार संबंधी ताजा स्थिति को प्रकाशित करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित करना उचित होगा।

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