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पंजाब ले जाए जा रहे 18 मासूम ट्रेनों से रेस्क्यू, बाल तस्करी और बाल मजदूरी की साजिश नाकाम

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित

(“18 Children Rescued from Trains, Human Trafficking Bid Foiled Before Reaching Punjab “) पंजाब में बाल मजदूरी के लिए मासूम बच्चों की तस्करी का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हरियाणा के अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर संयुक्त अभियान के दौरान दो दिनों में 18 बच्चों को ट्रेनों से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। ये बच्चे बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से पंजाब के विभिन्न शहरों में मजदूरी के लिए ले जाए जा रहे थे। इस कार्रवाई को जिला युवा विकास संगठन, रेलवे सुरक्षा बल (RPF), एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) और अन्य विभागों की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया।

जानकारी के अनुसार, बुधवार रात जननायक एक्सप्रेस से 12 बच्चों को और गुरुवार को कर्मभूमि एक्सप्रेस से 6 बच्चों को बचाया गया। प्रारंभिक पूछताछ में बच्चों ने बताया कि उन्हें लुधियाना सहित पंजाब के अलग-अलग इलाकों में काम दिलाने के नाम पर ले जाया जा रहा था। कुछ बच्चों को पेंटिंग ठेकेदार के पास करीब 5 हजार रुपये प्रतिमाह पर काम कराने की बात कही गई थी, जबकि कुछ को जैकेट बनाने की फैक्ट्री और बागानों में मजदूरी के लिए भेजा जा रहा था।

रेस्क्यू के बाद सभी बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) अंबाला के समक्ष पेश किया गया। इसके बाद उनकी सुरक्षा और देखभाल के लिए उन्हें ओपन शेल्टर होम भेज दिया गया, जहां उनकी काउंसलिंग की जा रही है और परिवारों से संपर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

जिला युवा विकास संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि देशभर में हर साल हजारों बच्चे बाल तस्करी और शोषण का शिकार बनते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को रोजगार का लालच देकर उनके नाबालिग बच्चों को दूसरे राज्यों में भेज दिया जाता है। रेलवे मार्ग अब बाल तस्करी का प्रमुख माध्यम बनता जा रहा है। प्रशासन, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सतर्कता से ही ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

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