चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“EPFO New Rules 2026: Big Change in PF Withdrawal “) देशभर के करोड़ों पीएफ खाताधारकों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए प्रावधानों के अनुसार अब नौकरी छूटने या इस्तीफा देने के तुरंत बाद कर्मचारी अपने पीएफ खाते से पूरा पैसा नहीं निकाल पाएंगे। इस फैसले का असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जो नौकरी बदलने या बेरोजगार होने की स्थिति में पीएफ की पूरी राशि निकालने की योजना बनाते थे।
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी कर्मचारी की नौकरी चली जाती है, तो वह अपने पीएफ फंड का केवल 75 प्रतिशत हिस्सा ही निकाल सकेगा। शेष 25 प्रतिशत राशि खाते में सुरक्षित रहेगी और इसे तभी निकाला जा सकेगा जब कर्मचारी लगातार 12 महीने तक बेरोजगार रहेगा। पहले के नियमों के अनुसार नौकरी छोड़ने के दो महीने बाद ही खाताधारक अपने पीएफ का 100 प्रतिशत पैसा निकाल सकते थे।
इसके अलावा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने पीएफ अंशदान से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। अब पीएफ योगदान के लिए अधिकतम वेतन सीमा 15,000 रुपये निर्धारित की गई है। इस सीमा तक कर्मचारी और नियोक्ता दोनों 12-12 प्रतिशत का योगदान करेंगे। यदि कोई कर्मचारी इससे अधिक राशि पीएफ में जमा करना चाहता है, तो उसे वीपीएफ (Voluntary Provident Fund) का विकल्प चुनना होगा।
ईपीएफओ ने नौकरी के दौरान एडवांस निकासी के नियमों में भी संशोधन किया है। अब शिक्षा के लिए पूरे सेवाकाल में अधिकतम 10 बार, शादी और घर निर्माण के लिए 5 बार, जबकि विशेष परिस्थितियों या मेडिकल जरूरतों के लिए 2 बार ही एडवांस निकासी की अनुमति होगी।
इन नए नियमों का उद्देश्य कर्मचारियों की लंबी अवधि की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना बताया जा रहा है। हालांकि, कई कर्मचारियों का मानना है कि अचानक बेरोजगारी की स्थिति में पूरे पीएफ फंड तक तुरंत पहुंच न होना आर्थिक चुनौतियां बढ़ा सकता है। ऐसे में सभी पीएफ खाताधारकों को नए नियमों को समझकर अपनी वित्तीय योजना पहले से तैयार रखने की सलाह दी जा रही है।



















