चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Mid-Day Meal Sparks Controversy! Shocking Incident Reported from a Government School “) चंडीगढ़ के सेक्टर-56 स्थित सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने मिड-डे मील योजना पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि स्कूल में तैनात मिड-डे मील से जुड़े कुछ महिला स्टाफ सदस्य बच्चों के लिए तैयार बचा हुआ खाना—जिसमें खिचड़ी और दाल शामिल थी—बाल्टियों में भरकर स्कूल के बाहर फेंकने ले जा रही थीं।
इसी दौरान मौके पर मौजूद एक पत्रकार की नजर इस पूरी घटना पर पड़ गई। जैसे ही स्टाफ को पता चला कि उनकी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड की जा रही हैं, वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बताया जा रहा है कि कैमरा देखते ही स्टाफ सदस्य तुरंत बाल्टियां वापस स्कूल के अंदर ले गए।
पूछताछ के दौरान स्टाफ ने दावा किया कि खाना बच गया था और उन्हें इसे फेंकने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये निर्देश किसने दिए? यदि भोजन पूरी तरह खाने योग्य था तो उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाने के बजाय फेंकने की तैयारी क्यों की गई? वहीं यदि भोजन खराब हो चुका था, तो उसके निपटान की निर्धारित सरकारी प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया?
जानकारी के अनुसार, स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि बचा हुआ मिड-डे मील पहले भी नियमित रूप से इसी तरह फेंका जाता रहा है, लेकिन इस पर कभी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। यदि यह सच है, तो यह सरकारी संसाधनों की बर्बादी के साथ-साथ बच्चों के अधिकारों से भी जुड़ा गंभीर मामला बन जाता है।
अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। लोग चाहते हैं कि शिक्षा विभाग और संबंधित प्रशासन यह स्पष्ट करे कि आखिर बच्चों के लिए तैयार भोजन को बर्बाद करने की नौबत क्यों आई और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।



















