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श्री हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए हुए बंद, इस साल पहुंचे 3.84 लाख श्रद्धालु

श्री हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए हुए बंद, इस साल पहुंचे 3.84 लाख श्रद्धालु

टारगेट न्यूज़ ग्राउंड रिपोर्ट: हेमकुंड साहिब की वार्षिक यात्रा इस बार भारी आस्था, कड़े सुरक्षा प्रबंधों और देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं के भारी सैलाब के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। शनिवार को एक भव्य धार्मिक समारोह के बीच विधिवत तरीके से श्री हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस पूरे सीजन के दौरान दुनिया के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने दुर्गम पहाड़ियों और चुनौतीपूर्ण मौसम की परवाह किए बिना अपने आराध्य के दर्शन किए। इस साल कुल 3.84 लाख श्रद्धालुओं ने यहाँ माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया, जो अपने आप में एक बड़ा आंकड़ा है। इस साल की यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि प्रबंधन और सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद सफल और ऐतिहासिक रही है, जिसमें विभिन्न विभागों और स्थानीय प्रशासन का अभूतपूर्व सहयोग देखने को मिला।

ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)

  • सख्‍त धार्मिक अनुष्ठानों और हुक्मनामा के साथ शनिवार को श्री हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
  • इस संपूर्ण यात्रा सीजन के दौरान वैश्विक स्तर से कुल 3.84 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र धाम के दर्शन किए।
  • यात्रा के अंतिम दिन हल्की बर्फबारी के बावजूद करीब 5,000 श्रद्धालु दरबार में मौजूद रहे।
  • केंद्रीय गृह मंत्रालय के विशेष प्रबंधों के तहत पाकिस्तान से आए 40 सदस्यीय तीर्थयात्री जत्थे ने भी इस समारोह में हिस्सा लिया।
  • आगामी ग्रीष्मकालीन सीजन में यह पवित्र यात्रा दोबारा मई महीने में शुरू की जाएगी।

घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)

शनिवार को सुबह से ही हेमकुंड साहिब के परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया था। कपाट बंद होने की इस वार्षिक रस्म की शुरुआत पवित्र सुखमनी साहिब के पाठ से हुई। इसके पश्चात श्री दरबार साहिब अमृतसर से आए हजूरी रागी भाई गुरदयाल सिंह और उनके जत्थे द्वारा मधुर देवकीन कीर्तन प्रस्तुत किया गया, जिससे पूरा वातारण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। निर्धारित परंपरा के अनुसार एक पावन ‘हुक्मनामा’ (दैवीय आदेश) प्राप्त किया गया। इसके बाद पंच प्यारों के नेतृत्व में और पूर्ण धार्मिक मर्यादा के साथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब को दीवान हॉल से सचखंड साहिब की ओर ससम्मान सुशोभित किया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वहाँ उपस्थित संगत भावुक नजर आई और वाहेगुरु का सिमरन करती रही। जैसे ही गुरु ग्रंथ साहिब को सुखासन स्थल पर ले जाया गया, वैसे ही धाम के कपाट आगामी सर्दियों के महीनों के लिए बंद कर दिए गए। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष यह यात्रा 23 मई को शुरू हुई थी और पिछले कुछ दिनों से हो रही हल्की बर्फबारी के बावजूद अंतिम दिन भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ।

प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)

इस बार की यात्रा को निर्बाध रूप से चलाने में सेना, राज्य सरकार, जिला प्रशासन और विभिन्न स्वैच्छिक संगठनों की भूमिका सराहनीय रही। गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने मीडिया को जानकारी दी कि इस वर्ष दुनिया भर से आए 3.84 लाख भक्तों ने यात्रा पूरी की। इस बार का मुख्य आकर्षण पाकिस्तान से आए 40 तीर्थयात्रियों का जत्था रहा, जिन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय के विशेष प्रबंधों के तहत यहाँ आने की अनुमति मिली थी। ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सेवा सिंह ने सेना, पुलिस, और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) का विशेष आभार व्यक्त किया।

यात्रा की सफलता इस बात का प्रमाण है कि हमारे सुरक्षा बलों, स्वयंसेवकों और प्रशासन ने किस निष्ठा के साथ काम किया। दुर्गम रास्तों पर तैनात सेवादारों की मेहनत के बिना यह सब संभव नहीं था। – सेवा सिंह, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ट्रस्ट

स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों ने भी रास्ते भर की गई व्यवस्थाओं की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। मौसम खराब होने के बावजूद चिकित्सा शिविर और सुरक्षा चौकियां हर समय मुस्तैद रहीं।

आगे क्या? (What Lies Ahead)

सर्दियों के इन आगामी महीनों में भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण हेमकुंड साहिब का यह पूरा क्षेत्र इंसानी आवाजाही के लिए पूरी तरह बंद रहेगा। इस दौरान यहाँ का तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है और रास्ते बर्फ की मोटी चादर से ढक जाते हैं। अब ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन आने वाले वर्ष 2027 के ग्रीष्मकालीन सीजन की तैयारियों में जुटेंगे। यात्रा मार्ग के रख-रखाव, ढांचागत विकास और सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा सर्दियों के बाद की जाएगी ताकि जब दोबारा मई में कपाट खुलें, तो देश और दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। तब तक के लिए गोविंदघाट और घांघरिया में भी शीतकालीन व्यवस्थाएं लागू कर दी गई हैं।

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