चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“FIR to be registered against these officers of Punjab! Know what the whole matter is”) पंजाब में पेड़ों की अवैध कटाई को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा गठित संयुक्त जांच कमेटी ने बर्नाला इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की सिफारिश की है। अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने 25 एकड़ जमीन पर बड़ी संख्या में पुराने और विरासती पेड़ों की अवैध कटाई करवाई और लकड़ी का गलत इस्तेमाल किया।
दरअसल, गांव काहनेके निवासी गुरप्रीत सिंह ने NGT में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि 31 जनवरी को झुग्गियां हटाने की कार्रवाई के दौरान करीब 140 पुराने पेड़ों को जड़ से उखाड़ दिया गया। इन पेड़ों में नीम, पीपल, बरगद, टाहली, कीकर और जंड जैसे 50 साल से ज्यादा पुराने पेड़ शामिल थे।
जांच के दौरान कमेटी ने मौके पर 55 कटे हुए पेड़ों की पहचान की, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 1.31 लाख रुपये बताई गई है। कमेटी ने सुझाव दिया है कि यह राशि संबंधित अधिकारियों से वसूली जाए। इसके साथ ही पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई के लिए 1:5 के अनुपात में नए पौधे लगाने और उनकी 5 साल तक देखभाल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
तीन सदस्यीय जांच कमेटी में वन अधिकारी कौशल किशोर, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जे.पी. मीना और वन विभाग के सनी गोयल शामिल थे। जांच में सामने आया कि जिला स्तर के अधिकारी बिना अनुमति पेड़ों की कटाई रोकने में नाकाम रहे। अब कमेटी ने बर्नाला SSP को सरकारी संपत्ति की चोरी और आपराधिक विश्वासघात जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की सलाह दी है।
इस मामले ने पंजाब में पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।



















