Home Punjab Teacher की अनोखी पहल, 37 बच्चों को घर से लाकर पढ़ाती हैं

Teacher की अनोखी पहल, 37 बच्चों को घर से लाकर पढ़ाती हैं

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित

(Teacher’s Unique Initiative: Brings 37 Children From Home to School) जब स्कूल की घंटी बजती है तो आमतौर पर बच्चे कक्षा की ओर दौड़ते हैं, लेकिन मियानी के सरकारी प्राइमरी स्कूल में एक शिक्षिका के लिए यही घंटी एक और जिम्मेदारी की शुरुआत भी करती है। यहां तैनात एकमात्र शिक्षिका जसवीर कौर सिर्फ बच्चों को पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई बार वह खुद उनके घरों तक जाती हैं और बच्चों को स्कूल लेकर आती हैं।

सरकारी प्राइमरी स्कूल मियानी पिछले कई वर्षों से Single-Teacher School के रूप में चल रहा है। स्कूल में कुल 37 विद्यार्थी पंजीकृत हैं और इन सभी की पढ़ाई, स्कूल के रिकॉर्ड, उपस्थिति तथा अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां एक ही शिक्षिका संभाल रही हैं। अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को एक साथ पढ़ाना अपने आप में चुनौतीपूर्ण काम है, लेकिन शिक्षिका ने इसे बच्चों की शिक्षा के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया।

स्कूल की एक बड़ी चुनौती यह भी है कि यहां पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे प्रवासी मजदूर परिवारों से आते हैं। उनके माता-पिता रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों से गांव पहुंचे हैं और ज्यादातर दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। सुबह से शाम तक काम पर रहने के कारण कई परिवारों के लिए बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजना हमेशा प्राथमिकता नहीं बन पाता।

ऐसे में जसवीर कौर ने एक अनोखा तरीका अपनाया है। जब कोई बच्चा स्कूल नहीं पहुंचता तो वह कई बार खुद उसके घर पहुंच जाती हैं और बच्चे को स्कूल लेकर आती हैं। उनका मकसद सिर्फ Attendance पूरी करना नहीं, बल्कि बच्चों में स्कूल आने की आदत और पढ़ाई के प्रति रुचि बनाए रखना है।

बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए Mid-Day Meal भी उनके प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। शिक्षिका बच्चों को उस दिन बनने वाले भोजन के बारे में बताती हैं और अलग-अलग व्यंजनों को लेकर उनसे बातचीत करती हैं। भोजन को लेकर बच्चों का उत्साह उन्हें स्कूल आने के लिए प्रेरित करता है।

एक शिक्षिका के लिए पूरे स्कूल को अकेले संभालना आसान नहीं है। उन्हें एक साथ कई कक्षाओं को पढ़ाने के अलावा रिकॉर्ड तैयार करना, प्रशासनिक कार्य देखना और विद्यार्थियों की उपस्थिति पर नजर रखनी पड़ती है। इसके बावजूद जसवीर कौर बच्चों की शिक्षा को लेकर लगातार प्रयास कर रही हैं।

Deputy Education Officer Manoj Kumar ने कहा कि अधिकारियों को निर्देश दिया जाएगा कि मियानी गांव की पंचायत की मदद से किसी Associate या गांव के किसी शिक्षक की तैनाती की व्यवस्था की जाए।

मियानी में जसवीर कौर की कहानी यह बताती है कि शिक्षक की जिम्मेदारी सिर्फ कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं होती। कभी-कभी एक बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा में बनाए रखने के लिए शिक्षक को स्कूल से निकलकर उसके घर तक जाना पड़ता है।

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