शिमला। राजवीर दीक्षित
(Uproar over Vande Mataram in the Legislative Assembly; proceedings adjourned) हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत ही जोरदार हंगामे के साथ हुई। सदन में ‘वंदे मातरम्’ नहीं गाए जाने को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायक आमने-सामने आ गए। विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाते हुए सदन में विरोध और नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके जवाब में सत्ता पक्ष के विधायक भी मैदान में उतर आए। बढ़ते हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी। सत्र की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई थी। इसके बाद विपक्षी विधायकों ने सवाल उठाया कि विधानसभा की कार्यवाही की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ से क्यों नहीं की गई। विपक्ष का तर्क था कि केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय गीत को लेकर जारी नए प्रावधान के तहत सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
‘वंदे मातरम्’ पर सदन में नारेबाजी
विपक्षी सदस्य इस मुद्दे पर खड़े होकर विरोध करने लगे। कुछ ही देर में सदन का माहौल गरमा गया और दोनों पक्षों की ओर से नारेबाजी शुरू हो गई। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने विपक्ष को शांत कराने का प्रयास किया और कहा कि सदन की कार्यवाही निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ाई जाएगी। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि केंद्र का नया प्रावधान सरकारी कार्यक्रमों से संबंधित है और इसे विधानसभा की कार्यवाही पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि हिमाचल विधानसभा में शुरुआत राष्ट्रगान से करने की परंपरा है, जबकि कार्यवाही के समापन पर राष्ट्रगीत गाने का प्रावधान है।
हंगामा बढ़ा तो स्थगित करनी पड़ी कार्यवाही
अध्यक्ष की सफाई के बावजूद विपक्षी विधायक शांत नहीं हुए। नारेबाजी और विरोध जारी रहने के कारण सदन की कार्यवाही सामान्य तरीके से नहीं चल सकी। आखिरकार स्पीकर को कार्यवाही स्थगित करने का फैसला लेना पड़ा।
सदन के बाहर भी इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव देखने को मिला। कांग्रेस ने BJP पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाया, जबकि भाजपा नेताओं ने कांग्रेस सरकार पर ‘वंदे मातरम्’ के अपमान का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया।
BJP ने बेरोजगारी को लेकर भी सरकार को घेरा
मानसून सत्र के पहले दिन भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में बेरोजगारी के मुद्दे पर प्रदर्शन किया। विधायक नारेबाजी करते हुए विधानसभा पहुंचे और कांग्रेस सरकार से युवाओं को रोजगार देने के चुनावी वादों का हिसाब मांगते नजर आए। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनाव के दौरान हर साल एक लाख और पांच साल में पांच लाख नौकरियां देने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि सरकार के लगभग पौने चार साल के कार्यकाल के बावजूद युवाओं को अपेक्षित संख्या में रोजगार नहीं मिल पाया है। रणधीर शर्मा का आरोप है कि सरकार ने जिन लोगों को रोजगार दिया है, उनमें भी बड़ी संख्या में नियुक्तियां नियमित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को आउटसोर्सिंग और विभिन्न योजनाओं के जरिए रोजगार दिया जा रहा है।
पहले दिन ही सियासी पारा चढ़ा
विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन दो बड़े मुद्दों—‘वंदे मातरम्’ और बेरोजगारी—के नाम रहा। एक ओर राष्ट्रगीत को लेकर सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखा टकराव हुआ, तो दूसरी ओर भाजपा ने रोजगार के मुद्दे पर सरकार को घेरा। ऐसे में आने वाले दिनों में विधानसभा की कार्यवाही के दौरान राजनीतिक गर्मी और बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं।



















