Home Recent विज्ञान का अनोखा करिश्मा: अब पेट के अंदर काम करेगी ‘कागज की...

विज्ञान का अनोखा करिश्मा: अब पेट के अंदर काम करेगी ‘कागज की बैटरी’, चिकित्सा जगत में बड़ी क्रांति

विज्ञान का अनोखा करिश्मा: अब पेट के अंदर काम करेगी 'कागज की बैटरी', चिकित्सा जगत में बड़ी क्रांति

टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी शोध सामने आया है, जहां एमआईटी (MIT) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी ‘निगलने योग्य’ बैटरी विकसित की है जो शरीर के अंदर जाकर मेडिकल उपकरणों को ऊर्जा प्रदान कर सकती है। यह तकनीक न केवल भविष्य के इलाज के तरीकों को बदल देगी, बल्कि पारंपरिक बैटरी से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को भी पूरी तरह खत्म कर देगी।

कागज से बनी बैटरी: कैसे काम करती है यह तकनीक?

यह अभिनव बैटरी मुख्य रूप से कागज और विशेष इलेक्ट्रोड से तैयार की गई है। पेट के अम्लीय वातावरण में पहुंचते ही यह सक्रिय हो जाती है और मेडिकल सेंसर या ड्रग डिलीवरी सिस्टम को बिजली की आपूर्ति करती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपना काम पूरा करने के बाद यह शरीर के अंदर ही सुरक्षित रूप से घुल जाती है, जिससे किसी सर्जरी या जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं पड़ती।

सूअरों पर सफल परीक्षण

वैज्ञानिकों ने इस तकनीक का प्रारंभिक परीक्षण सूअरों पर किया है, जिसके परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह बैटरी पेट के भीतर विभिन्न कार्यों को संचालित करने में सक्षम है। इस परीक्षण ने साबित कर दिया है कि शरीर के अंदरूनी अंगों की निगरानी और उपचार के लिए यह एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक ‘इलेक्ट्रोस्यूटिकल्स’ (Electroceuticals) के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी, जिससे पाचन संबंधी बीमारियों का इलाज अधिक सटीक और प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।

प्रमुख विशेषताएं और भविष्य की संभावनाएं

  • सुरक्षा: यह बैटरी पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल है, जिससे विषाक्तता का खतरा नहीं है।
  • उपयोगिता: यह पेट के अंदर दवा छोड़ने वाले उपकरणों को पावर देने में सक्षम है।
  • निगरानी: पाचन तंत्र की समस्याओं को ट्रैक करने के लिए यह एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
  • सरलता: इसे किसी भी अन्य दवा की तरह निगला जा सकता है, जो इसे मरीजों के लिए बेहद सुविधाजनक बनाता है।

यह शोध चिकित्सा जगत के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है, जहां अब शरीर के अंदरूनी हिस्सों का इलाज बिना किसी चीर-फाड़ के संभव हो सकेगा। आने वाले समय में, यह तकनीक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों के निदान और उपचार में एक अनिवार्य हिस्सा बन सकती है।

Translate »
error: Content is protected !!
BREAKING NEWS
ऑपरेशन शहीद: 35 मामलों में वांछित कुख्यात गैंगस्टर गुरविंदर उर्फ अफरीदी इथियोपिया से डिपोर्ट होकर भारत लौटा अंडर-19 एशिया कप: अर्जुन राजपूत के शानदार शतक से पाकिस्तान के खिलाफ संकट से उबारी भारतीय टीम पंजाब में तकनीकी सुधारों से खनन राजस्व सात गुना बढ़कर 799 करोड़ रुपये हुआ: वरिंदर कुमार गोयल बद्दी में विजिलेंस ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई, चंडीगढ़ और पंजाब में बिक्री के लिए लाई गई अवैध शराब जब्त 54वीं नेहरू जूनियर हॉकी प्रतियोगिता: चंडीगढ़ को सोनीपत से मिली हार, ओडिशा ने पंजाब को हराया इंदौर में दिलजीत dosanjh के koncert पर बड़ा फैसला, इन 4 गानों के प्रदर्शन पर लगी रोक फतेहगढ़ साहिब में शहीदी सभा से पहले सड़कों की गुणवत्ता पर उठे सवाल मोहाली का समगौली कचरा संयंत्र जल्द होगा शुरू, मेयर ने दी जानकारी दीवाली पर नेत्र आपातकाल से निपटने के लिए पीजीआई ने की पूरी तैयारी, 20 डॉक्टरों की टीम तैनात जातिसूचक टिप्पणी विवाद: कांग्रेस नेता वरिंदर ढिल्लों ने गुरुद्वारा साहिब में खाई कसम, खुद को बताया बेकसूर