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घर की सफाई के दौरान भूलकर भी न छोड़ें ये जरूरी कोने, वरना सेहत पर पड़ेगा भारी असर

घर की सफाई के दौरान भूलकर भी न छोड़ें ये जरूरी कोने, वरना सेहत पर पड़ेगा भारी असर

टारगेट न्यूज़ ग्राउंड रिपोर्ट: जब भी हम अपने आशियाने की साफ-सफाई करने बैठते हैं, तो हमारा पूरा ध्यान अक्सर जमीन पर झाड़ू-पोछा लगाने, सोफे और बेड की धूल झाड़ने या फिर दीवारों और पर्दों को चमकाने पर ही केंद्रित रहता है। हम में से अधिकांश लोग घर की ऊपरी तौर पर दिखने वाली चमक-धमक को ही असली सफाई मान लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ ऐसे गुप्त और छिपे हुए कोने भी होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना हमारी और हमारे परिवार की सेहत के लिए भारी पड़ सकता है? आज इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको उन बेहद महत्वपूर्ण और नजरअंदाज किए जाने वाले हिस्सों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं, जिनकी डीप क्लीनिंग बेहद जरूरी है।

ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)

  • घर की सफाई में अक्सर वेंटिलेशन डक्ट्स, एग्जॉस्ट फैन और एसी फिल्टर्स को छोड़ दिया जाता है।
  • किचन के चिमनी के अंदरूनी हिस्से और कैबिनेट के ऊपरी हिस्सों पर महीनों तक जमी चिकनाई बैक्टीरिया का घर बन जाती है।
  • फर्नीचर के पिछले हिस्से और मैट्रेस के अंदर जमा होने वाली धूल गंभीर एलर्जी और अस्थमा जैसी बीमारियों का कारण बनती है।
  • नियमित रूप से डोरमैट, स्विच बोर्ड और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के की-बोर्ड की सफाई न होना एक बड़ी लापरवाही है।

घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)

सफाई अभियानों और हेल्थ एक्सपर्ट्स के हालिया सर्वे बताते हैं कि लोग आमतौर पर फेस्टिव सीजन या वीकेंड पर ही घर की सफाई करते हैं। इस प्रक्रिया में सबसे पहले बड़े कमरों और लिविंग रूम को साफ किया जाता है, जहां मेहमानों की आवाजाही होती है। इसके बाद किचन और बाथरूम की टर्न आती है। इस पूरी प्रक्रिया में समय की कमी के कारण उन जगहों को छोड़ दिया जाता है जो आंखों के सामने तुरंत नहीं आतीं। उदाहरण के लिए, रेफ्रिजरेटर के नीचे का हिस्सा, सोफे और डाइनिंग टेबल के नीचे के कोने, और वार्डरोब के पीछे की दीवारें। इन स्थानों पर महीनों तक नमी और धूल का ऐसा चक्र चलता रहता है जो फंगस और मोल्ड को जन्म देता है।

जब सर्दियों या गर्मियों के मौसम की शुरुआत में हम अपने पंखों, एसी और हीटर को ऑन करते हैं, तो इनमें जमा महीनों पुरानी डस्ट सीधे हवा में फैल जाती है। यह हवा सांस के जरिए हमारे फेफड़ों तक पहुंचती है। इसी प्रकार, बाथरूम के एग्जॉस्ट फैन पर जमी गंदगी और पानी के निकास पाइपों के आसपास का क्षेत्र सीलन के कारण हानिकारक बैक्टीरिया पैदा करता है। सीलन और फंगस की यह समस्या धीरे-धीरे पूरे घर के वातावरण को दूषित कर देती है, जिससे घर के बुजुर्गों और छोटे बच्चों को सांस लेने में कठिनाई, त्वचा में खुजली और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)

हेल्थ और सैनिटेशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि घर की सफाई केवल कॉस्मेटिक नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह हाइजीनिक और हेल्थ ओरिएंटेड होनी चाहिए। हाल ही में विभिन्न मेडिकल एसोसिएशन द्वारा चलाए गए जागरूकता अभियानों में यह बात सामने आई है कि आधुनिक शहरी जीवनशैली में लोग डीप क्लीनिंग के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं। कई रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) अब अपने सोसायटियों में विशेष सफाई शिविर आयोजित कर रहे हैं और लोगों को यह समझा रहे हैं कि केवल फर्श चमका देने से घर स्वच्छ नहीं हो जाता।

घर की सफाई करते समय सिर्फ उन जगहों को न चमकाएं जो मेहमानों को दिखती हैं, बल्कि उन कोनों पर विशेष ध्यान दें जो आपकी खुली आंखों से ओझल रहते हैं। अदृश्य धूल और बैक्टीरिया ही अक्सर बीमारियों की असली जड़ होते हैं। – डॉ. आलोक वर्मा, वरिष्ठ स्वास्थ्य विशेषज्ञ

आगे क्या? (What Lies Ahead)

भविष्य में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि हम अपनी सफाई की आदतों में बदलाव लाएं। हर महीने कम से कम एक बार घर के सभी हिडन कॉर्नर, एसी फिल्टर्स, किचन चिमनी, और डक्ट्स की प्रोफेशनल या डीप क्लीनिंग की योजना बनानी चाहिए। नेचुरल डिसइफेक्टेंट का उपयोग करके हम अपने घर के वातावरण को पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं। याद रखें, साफ-सुथरा और शुद्ध हवा वाला घर ही एक सुखी और स्वस्थ परिवार की नींव रखता है, इसलिए आज ही अपने घर के उन अनछुए कोनों की लिस्ट बनाएं और उनकी सफाई में जुट जाएं।

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