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छात्रों की आत्महत्याओं में 4.3% की बढ़ोतरी, 14 हजार से ज्यादा युवाओं की मौत: NCRB रिपोर्ट

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित

(“4.3% rise in student suicides, over 14,000 youths lost their lives: NCRB report “) देश में छात्रों के बीच बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। National Crime Records Bureau यानी NCRB की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में छात्र आत्महत्या के मामलों में बड़ा उछाल देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में कुल 14,488 छात्रों ने आत्महत्या की, जो पिछले एक दशक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। यह संख्या साल 2023 के मुकाबले 4.3 प्रतिशत अधिक है, जब ऐसे 13,892 मामले दर्ज किए गए थे।

चौंकाने वाली बात यह है कि जहां देश में कुल आत्महत्या दर में 0.4 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज हुई है, वहीं छात्रों में आत्महत्या की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2015 की तुलना में 2024 तक छात्र आत्महत्या के मामलों में 62.2 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र से सामने आए हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु का स्थान है।

NCRB के मुताबिक, पारिवारिक समस्याएं आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आई हैं, जो कुल मामलों का 33.5 प्रतिशत हैं। वहीं पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगिता और मानसिक तनाव भी बड़ी वजह माने जा रहे हैं। हाल ही में नागपुर में छात्रों की आत्महत्या के मामलों के बाद विरोध प्रदर्शन भी हुए, जहां बेहतर काउंसलिंग व्यवस्था और अकादमिक दबाव कम करने की मांग उठाई गई।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आत्महत्या करने वाले छात्रों में सबसे बड़ी संख्या उन विद्यार्थियों की थी, जिन्होंने केवल सेकेंडरी स्तर यानी 10वीं तक की पढ़ाई की थी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़े देश में छात्रों की बिगड़ती मानसिक स्थिति और बढ़ते तनाव की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। अब जरूरत है कि स्कूलों और कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर कदम उठाए जाएं ताकि युवाओं को समय रहते सहारा मिल सके।

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