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42 पूर्व जजों का SIR को समर्थन, ‘वोट चोरी’ के दावों पर सबूत की मांग

नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित 

(42 former judges back SIR, demand evidence for ‘vote theft’ claims) चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार लगाए जा रहे आरोपों के बीच 42 पूर्व जजों ने एक पत्र के जरिए गंभीर चिंता जताई है। पूर्व न्यायाधीशों ने ‘वोट चोरी’ जैसे दावों के समर्थन में ठोस सबूत पेश किए जाने की जरूरत बताई है। साथ ही उन्होंने SIR प्रक्रिया का समर्थन करते हुए चुनावी प्रक्रिया पर लगाए जा रहे आरोपों पर सवाल उठाए हैं।

पत्र में कहा गया है कि संवैधानिक संस्थाओं पर गंभीर आरोप लगाना आसान है, लेकिन ऐसे आरोपों के लिए ठोस तथ्य और प्रमाण भी सामने आने चाहिए। पूर्व जजों ने बिना पर्याप्त सबूत के ‘वोट चोरी’ के दावों को लेकर चिंता जाहिर की।

सिटिंग जज की टिप्पणी से बढ़ी बहस

इस पूरे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज जस्टिस उज्जल भुइयां की 4 अक्टूबर को NALSAR यूनिवर्सिटी में की गई टिप्पणी भी चर्चा में है। उन्होंने कहा था कि लाखों भारतीय नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मूल रूप से मनमानी मानी जा सकती है।

इसके अगले दिन 5 अक्टूबर को पूर्व CJI जस्टिस गवई ने लंबित मामले पर मौजूदा सुप्रीम कोर्ट जज की सार्वजनिक टिप्पणी को लेकर न्यायिक मर्यादा का सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विचाराधीन मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी से बचना चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट के दो रिटायर्ड जजों के बयानों पर भी उन्होंने सवाल उठाए।

SIR पर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित

SIR से जुड़ी कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इसके अलावा चुनाव आयोग से जुड़े नए कानून की संवैधानिक वैधता पर भी सुनवाई होनी है। इस कानून में मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति वाले चयन पैनल से CJI को बाहर रखा गया है।

5 अक्टूबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित मामले में तत्काल अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि कुछ फैसले निर्धारित प्रक्रिया या सहमति के बिना लिए गए पाए गए, तो उन्हें वापस लेने का विकल्प खुला रहेगा।

यानी एक तरफ SIR को लेकर विपक्ष के तीखे सवाल हैं, तो दूसरी तरफ 42 पूर्व जजों ने प्रक्रिया के समर्थन के साथ ‘वोट चोरी’ के आरोपों के लिए सबूत की मांग कर बहस को और गरमा दिया है।

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