लुधियाना । राजवीर दीक्षित
(Alleged land grab of ₹20 crore! Famous Ragi Jagadhriwala’s family vs MLA — big revelations of a ‘60–40’ deal, threats, and a political conspiracy) लुधियाना से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां मशहूर रागी भाई हरबंस सिंह जगाधरी वालों के पोते महागुरजोत सिंह ने करीब 20 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जा करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पूरे मामले में राजनीति की एंट्री ने विवाद को और भी गरमा दिया है।
महागुरजोत सिंह के मुताबिक, उनके दादा ने साल 1989 में लुधियाना के दुगरी मेन रोड पर यह जमीन खरीदी थी, जो आज भी सरकारी रिकॉर्ड में उनके परिवार के नाम दर्ज है। लेकिन दिसंबर 2023 में अचानक पता चला कि कुछ लोगों ने फर्जी रजिस्ट्री के जरिए इस जमीन पर कब्जा कर लिया है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि कब्जाधारियों ने जो दस्तावेज पेश किए हैं, उनमें फोटो तक फर्जी तरीके से लगाई गई है—यह फोटो कथित तौर पर पुरानी ऑडियो कैसेट से काटकर इस्तेमाल की गई। न तो कोई बैंक ट्रांजेक्शन हुआ और न ही कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब एक व्यक्ति खुद को NRI बताकर सस्ते दामों में जमीन खरीदने पहुंचा। बाद में खुलासा हुआ कि वह व्यक्ति विधायक का ड्राइवर है। महागुरजोत का आरोप है कि जब वे शिकायत लेकर विधायक के पास पहुंचे तो उन्हें मदद के बजाय “60-40” का समझौता ऑफर किया गया—यानी 60% पैसा वे रखें और 40% कब्जाधारियों को दे दें।
महागुरजोत ने दावा किया कि विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू इस पूरे मामले में कब्जाधारियों को संरक्षण दे रहे हैं। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री से लेकर दिल्ली तक शिकायत भेजी। उनका आरोप है कि 2 अप्रैल 2026 को विधायक के घर बुलाकर उन्हें धमकाया गया और कहा गया कि अगर शिकायत वापस नहीं ली तो जमीन कभी वापस नहीं मिलेगी।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि विधायक के घर में उस समय सिविल कपड़ों में हथियारबंद लोग मौजूद थे, जिससे डरकर उन्हें दबाव में बयान देना पड़ा। परिवार का कहना है कि उन्होंने पुलिस और प्रशासन से कई बार गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
वहीं, दूसरी तरफ विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि यह पूरा मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है और उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि महागुरजोत सिंह को गुमराह कर उनके खिलाफ वीडियो डलवाई गई।
इस पूरे विवाद ने लुधियाना में जमीन माफिया, फर्जी रजिस्ट्री और राजनीतिक संरक्षण जैसे गंभीर मुद्दों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। अब सबकी नजर प्रशासन और सरकार की कार्रवाई पर टिकी हुई है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में सच्चाई कब सामने आती है।



















