शिमला । राजवीर दीक्षित
(FIR Registered Against Advocate Vinay Sharma, Arrest Likely! Panic After Complaint by Chief Secretary) हिमाचल प्रदेश की प्रशासनिक और कानूनी गलियारों में उस समय हलचल मच गई जब राज्य के मुख्य सचिव संजय गुप्ता की शिकायत पर एडवोकेट विनय शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई। शिमला पुलिस थाना में दर्ज इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 248, 351 और 356(2) के तहत कार्रवाई की गई है। इनमें धारा 351 को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध बताया गया है, जिसके चलते मामले में गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है।
एफआईआर के अनुसार, विवाद की जड़ 24 मार्च 2026 को दायर की गई एक शिकायत है, जिसमें एडवोकेट विनय शर्मा ने मुख्य सचिव संजय गुप्ता के खिलाफ भूमि खरीद, बेनामी संपत्ति, पद के दुरुपयोग, आय के स्रोत, संपत्ति के अवमूल्यन और प्रशासनिक हस्तक्षेप जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। मुख्य सचिव का आरोप है कि ये सभी आरोप पूरी तरह तथ्यहीन, भ्रामक और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की नीयत से लगाए गए।
संजय गुप्ता ने अपनी शिकायत में कहा है कि भूमि लेन-देन से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियां और अनुमतियां नियमानुसार संबंधित विभागों और सरकार को समय पर उपलब्ध कराई गई थीं। उन्होंने दावा किया कि शिकायत में लगाए गए आरोप न केवल आधिकारिक रिकॉर्ड के विपरीत हैं, बल्कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा की गई जांच में भी इन्हें गलत, कानूनी रूप से कमजोर और दस्तावेजी साक्ष्यों से असमर्थित पाया गया।
एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया है कि सरकारी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक पत्राचार को आपराधिक गतिविधि के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया, जबकि उपलब्ध दस्तावेज इन दावों का समर्थन नहीं करते। मुख्य सचिव का कहना है कि इस तरह के आरोपों से उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा, ईमानदारी और संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की जांच सहायक उपनिरीक्षक रूप लाल को सौंपी गई है। अब सभी की निगाहें इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली कानूनी कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारी पर टिकी हुई हैं।



















