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चुनावों पर हाईकोर्ट की सख्ती! अब पोलिंग बूथ के अंदर-बाहर रहेगी CCTV की नजर, काउंटिंग सेंटर की भी होगी रिकॉर्डिंग

चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित

(Strict stance by the High Court on the elections!)नगर कौंसिल और नगर पंचायत चुनावों से ठीक चार दिन पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चुनाव के दौरान सभी पोलिंग बूथों के अंदर और बाहर CCTV कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, फर्जी मतदान या बाहरी हस्तक्षेप को रोका जा सके।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मतगणना केंद्रों यानी काउंटिंग सेंटरों में भी पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य कर दी है। अदालत ने कहा कि वोटों की गिनती की पूरी प्रक्रिया CCTV कैमरों की निगरानी में होगी और इसकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाएगी।

यह आदेश उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया, जिनमें नगर कौंसिल और नगर पंचायत चुनावों को निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से करवाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से पोलिंग बूथों, काउंटिंग सेंटरों और बैलेट बॉक्स रखने वाले स्थानों पर CCTV कैमरे लगाने के निर्देश जारी करने की मांग की थी।

जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मंचंदा की खंडपीठ ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग की ओर से दिए गए आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि पिछले चुनावों की तरह इस बार भी पोलिंग स्टेशनों के अंदर और बाहर CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। अदालत ने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति मतदान केंद्र के आसपास न घूम सके।

हाईकोर्ट ने साफ कहा कि केवल पोलिंग बूथ ही नहीं, बल्कि रिटर्निंग ऑफिसर के कमरे के अंदर और बाहर भी CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। अदालत ने आदेश दिया कि इन कैमरों की फुटेज को कम से कम एक साल तक सुरक्षित रखा जाए। अगर चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली कोई याचिका दायर होती है, तो चुनाव ट्रिब्यूनल की अनुमति के बिना कोई फुटेज नष्ट नहीं की जा सकेगी।

अदालत ने चुनाव अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की है। कोर्ट ने कहा कि पूरे चुनाव और मतगणना प्रक्रिया के दौरान CCTV कैमरों का सही तरीके से काम करना सुनिश्चित करना रिटर्निंग ऑफिसर की जिम्मेदारी होगी। चुनाव खत्म होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर को राज्य चुनाव आयोग को रिपोर्ट देनी होगी कि सभी कैमरे पूरी प्रक्रिया के दौरान सुचारू रूप से कार्य कर रहे थे।

हाईकोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई CCTV कैमरा बंद पाया गया या ठीक से कार्य नहीं कर रहा हुआ, तो संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पंजाब राज्य चुनाव आयोग को ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश करने का अधिकार भी दिया गया है। संबंधित विभागों को छह महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट आयोग को सौंपनी होगी।

इसके अलावा अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि CCTV कैमरों में तारीख और समय की स्पष्ट रिकॉर्डिंग होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी जांच के दौरान साक्ष्य के रूप में उनका इस्तेमाल किया जा सके।

हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन को भी चुनावों के दौरान पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि यदि किसी उम्मीदवार को अपनी जान को खतरा महसूस होता है और वह संबंधित जिला के SSP को शिकायत देता है, तो पुलिस तुरंत आवश्यक सुरक्षा कदम उठाए।

चुनावों से पहले हाईकोर्ट का यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है।

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