चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Punjab Power Crisis “) पंजाब में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और बारिश की कमी के बीच बिजली संकट गहराता जा रहा है। राज्य के कई जिलों में बिना किसी पूर्व सूचना के लगाए जा रहे लंबे बिजली कटों ने आम जनता, किसानों और उद्योगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। हालात ऐसे बन गए कि लुधियाना के सेक्टर-32, राजीव गांधी कॉलोनी, संजय गांधी कॉलोनी और आसपास के इलाकों के लोग आधी रात को सड़कों पर उतर आए और बिजली विभाग के कार्यालय का घेराव कर दिया।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए जारी पावरकॉम के हेल्पलाइन नंबर 1912 पर कोई फोन नहीं उठाता। स्थानीय अधिकारियों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि रात-रात भर बिजली गुल रहने से नींद पूरी नहीं हो रही, जबकि सुबह के समय कट लगने से पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है।
बिजली संकट का असर उद्योगों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। लुधियाना के उद्योगपतियों का कहना है कि रात की शिफ्टों में कई-कई घंटे बिजली बंद रहने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है और मजदूर खाली बैठने को मजबूर हैं। उद्योग संगठनों ने मांग की है कि यदि बिजली कट लगाने जरूरी हैं तो उनका शेड्यूल पहले से जारी किया जाए, ताकि उत्पादन की योजना बनाई जा सके।
उधर, विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर पंजाब सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने सरकार के बिजली सरप्लस होने के दावों पर सवाल उठाए, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने मुख्यमंत्री से बिजली संकट का तत्काल समाधान करने की मांग की। उनका कहना है कि किसानों, उद्योगों और आम लोगों को राहत मिलनी चाहिए, केवल दावों से काम नहीं चलेगा।
बताया जा रहा है कि राज्य में बिजली की मांग 16 हजार मेगावाट के पार पहुंच चुकी है। बढ़ती मांग और अनशेड्यूल्ड पावर कट के कारण पंजाब में बिजली संकट अब बड़ा राजनीतिक और जनहित का मुद्दा बनता जा रहा है। जनता अब जल्द समाधान की उम्मीद लगाए बैठी है।



















