नई दिल्ली । राजवीर दीक्षित
(PM Modi’s Breakfast Surprise for New MPs! Social Media ‘Report Cards’ Put on Display)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सप्ताह नए सांसदों को नाश्ते के लिए अपने आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर बुलाया। सांसदों ने सोचा था कि यह मुलाकात सामान्य बातचीत और नाश्ते तक सीमित होगी, लेकिन वहां पहुंचते ही उनके सामने एक ऐसा दस्तावेज रखा मिला, जिसने सबका ध्यान खींच लिया।
हर सांसद की सीट पर रखे इस कागज में पिछले एक महीने की सोशल मीडिया एक्टिविटी का पूरा हिसाब था। Facebook, Instagram, X और YouTube पर उनकी मौजूदगी, पोस्ट की संख्या, फॉलोअर्स और लोगों की प्रतिक्रिया से जुड़े आंकड़े इसमें शामिल थे।
रिपोर्ट में खास तौर पर Engagement Rate पर जोर दिया गया। यानी सांसद जो पोस्ट कर रहे हैं, उस पर लोगों की कितनी प्रतिक्रिया मिल रही है और कितने लोग उससे जुड़ रहे हैं। आंकड़ों के जरिए सांसदों को यह संकेत दिया गया कि सोशल मीडिया पर सिर्फ मौजूद रहना काफी नहीं, बल्कि जनता के साथ मजबूत जुड़ाव बनाना भी जरूरी है।
सूत्रों के मुताबिक, सांसदों को सीधे तौर पर सोशल मीडिया बढ़ाने का निर्देश नहीं दिया गया। इसके बजाय उनके सामने आंकड़े रखकर उन्हें खुद यह समझने का मौका दिया गया कि उनकी डिजिटल पहुंच कितनी प्रभावी है और कहां सुधार की गुंजाइश है।
दरअसल, बीजेपी की संचार रणनीति में सोशल मीडिया को लेकर तेजी दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री मोदी खुद Instagram पर कई Reels पोस्ट कर चुके हैं। इनमें परीक्षा सुधार, छात्रों से जुड़े मुद्दे और राष्ट्रीय हथकरघा दिवस जैसे विषय शामिल रहे हैं।
NDA के कई वरिष्ठ नेता भी अब सेल्फी वीडियो और छोटे डिजिटल कंटेंट के जरिए लोगों तक पहुंच बना रहे हैं। सांसद भी इस बदलाव का हिस्सा बन रहे हैं। बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत Instagram पर काफी सक्रिय हैं और उनके वीडियो छात्र आंदोलनों तथा दूसरे मुद्दों पर लगातार चर्चा में रहते हैं।
इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है युवा वर्ग तक सीधी पहुंच। आज बड़ी संख्या में युवा खबरों, विचारों और आंदोलनों से सोशल मीडिया के जरिए जुड़ते हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म सिर्फ प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की प्रतिक्रिया समझने का जरिया भी बन चुके हैं।
सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए आंदोलनों को तेजी से संगठित किया जा सकता है। दुनिया में कई बड़े आंदोलनों में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका सामने आ चुकी है। हालिया उदाहरण के तौर पर 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुआ ‘संसद चलो’ मार्च भी बताया गया।
यही वजह है कि अब सोशल मीडिया पर सक्रियता को लेकर सांसदों के प्रदर्शन का आंकड़ों के जरिए आकलन किया जा रहा है। पार्टी की रणनीति में यह बदलाव साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में डिजिटल संवाद और जनता से ऑनलाइन जुड़ाव राजनीति का और बड़ा हिस्सा बनने वाला है।
इसी सप्ताह प्रधानमंत्री मोदी ने 36 नए राज्यसभा सांसदों और 41 नए लोकसभा सांसदों को नाश्ते पर आमंत्रित किया था। लेकिन इस मुलाकात में नाश्ते के साथ मिला सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड शायद सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया।



















