Home Punjab त्योहारी सीजन में लुधियाना के खाद्य सुरक्षा विभाग की पोल खुली, मात्र...

त्योहारी सीजन में लुधियाना के खाद्य सुरक्षा विभाग की पोल खुली, मात्र 4 अधिकारियों और एक गाड़ी के सहारे चल रही है छापेमारी

त्योहारी सीजन में लुधियाना के खाद्य सुरक्षा विभाग की पोल खुली, मात्र 4 अधिकारियों और एक गाड़ी के सहारे चल रही है छापेमारी

टारगेट न्यूज़ एक्सप्लेनर: त्योहारी सीजन शुरू होते ही बाजार में मिलावटखोरों का सक्रिय होना आम बात है, लेकिन पंजाब के औद्योगिक शहर लुधियाना में मिलावट के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की पोल खुल गई है। एक तरफ त्योहारी सीजन में खोया और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने की बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर लुधियाना जैसे विशाल जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग केवल चार अधिकारियों और एक ही वाहन के सहारे काम करने को मजबूर है। स्थिति इतनी दयनीय है कि एक वाहन होने के कारण चारों अधिकारियों ने छापेमारी के लिए अलग-अलग दिन तय किए हैं, ताकि वाहन उपलब्ध हो सके। इस गंभीर प्रशासनिक संकट और संसाधनों की भारी कमी के कारण त्योहारी दिनों में उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खुलेआम खिलवाड़ होने की आशंका बनी हुई है।

5 प्रमुख बातें जो आपको जाननी चाहिए (5 Key Takeaways)

  • लुधियाना जिले को कुल छह प्रशासनिक जोन में बांटा गया है, जहां आदर्श रूप से कम से कम 10 से 12 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की आवश्यकता है।
  • वर्तमान में पूरे जिले के लिए केवल चार खाद्य सुरक्षा अधिकारी तैनात हैं, और इनमें से एक अधिकारी के पास मोगा जिले का अतिरिक्त प्रभार भी है।
  • पूरे विभाग के पास केवल एक ही वाहन उपलब्ध है, जिसकी वजह से अधिकारी एक समय में केवल एक ही जगह निरीक्षण या छापेमारी के लिए जा सकते हैं।
  • एक ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी उपलब्ध होने के कारण, सैंपल एकत्र करने और उन्हें खरड़ लैब तक पहुंचाने का कार्य उसी कर्मचारी की उपस्थिति पर निर्भर करता है।
  • वीआईपी दौरों और ड्यूटी के दौरान खाद्य सुरक्षा विंग को अपनी गाड़ियां और दल तैनात करना पड़ता है, जिसके चलते उस दिन कोई भी छापेमारी या निरीक्षण कार्य नहीं हो पाता है।

मामला क्या है? (Understanding the Core Issue)

रक्षाबंधन और गणेश चतुर्थी जैसे बड़े त्योहार बीत चुके हैं और अब नवरात्रि तथा दीपावली का त्योहारी सीजन बिल्कुल करीब है। इस समय के दौरान बाजारों में मिठाइयों, दूध, खोया और पनीर की मांग कई गुना बढ़ जाती है। मांग और आपूर्ति के इस भारी अंतर का फायदा उठाते हुए मुनाफाखोर पड़ोसी राज्यों से बड़े पैमाने पर मिलावटी और सिंथेटिक उत्पाद बाजार में खपाते हैं। हाल ही में पंजाब सरकार ने एनालॉग पनीर पर एक साल का प्रतिबंध लगाया है और इस प्रतिबंध को लागू करने के लिए राज्य भर में छापेमारी के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, लुधियाना जिले के जमीनी हालात इन सरकारी दावों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। जिले में संसाधनों की भारी कमी के कारण न तो नियमित रूप से बाजारों की चेकिंग हो पा रही है और न ही मिलावटखोरों पर कोई बड़ा शिकंजा कसा जा रहा है। एक तरफ जहां सरकार लोगों को शुद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ विभाग के पास फील्ड में उतरने के लिए बुनियादी साधन तक मौजूद नहीं हैं।

मुख्य कारण और वजहें (Root Causes)

इस संकट के पीछे सबसे बड़ा कारण प्रशासनिक स्तर पर स्टाफ और बुनियादी ढांचे की भारी कमी है। लुधियाना जैसे घनी आबादी वाले और व्यावसायिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जिले को सुचारू रूप से चलाने के लिए छह जोन में विभाजित किया गया है। हर जोन में कम से कम दो अधिकारियों की नियुक्ति होनी चाहिए थी ताकि नियमित निगरानी रखी जा सके। लेकिन विडंबना यह है कि पूरे जिले की जिम्मेदारी मात्र चार अधिकारियों के कंधों पर है। इसके अलावा, प्रशासनिक मशीनरी की लाचारी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरे विभाग के पास गश्त और निरीक्षण के लिए केवल एक ही वाहन है। यदि एक जोन में कोई अधिकारी छापेमारी के लिए इस वाहन का उपयोग कर रहा है, तो बाकी के तीन अधिकारियों को अपने क्षेत्र में जाने के लिए वाहन के लौटने का इंतजार करना पड़ता है। इस लॉजिस्टिक समस्या से पार पाने के लिए चारों अधिकारियों ने आपस में सहमति बनाकर अलग-अलग दिन तय किए हैं, ताकि हर कोई अपनी बारी पर उस एकमात्र वाहन का उपयोग कर सके। यही नहीं, जब भी शहर में कोई वीआईपी दौरा होता है, तो जिला स्वास्थ्य अधिकारी और खाद्य सुरक्षा टीम को अनिवार्य रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज करवानी होती है। इस दौरान पूरी टीम और वही एकमात्र वाहन वीआईपी ड्यूटी में व्यस्त हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप उस दिन आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी दुकान पर कोई छापा नहीं मारा जाता। इसके साथ ही, सैंपलिंग प्रक्रिया में भी केवल एक ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी उपलब्ध है जो सैंपल एकत्र करने में मदद करता है और उन्हें जांच के लिए खरड़ प्रयोगशाला तक पहुंचाता है। उस कर्मचारी की अनुपस्थिति में कोई भी नया सैंपल नहीं लिया जा सकता है।

जिला स्वास्थ्य अधिकारी और खाद्य सुरक्षा विंग के प्रभारी डॉ. आशीष चावला ने कहा, “छह जोन के लिए हमारे पास केवल चार एफएसओ हैं जिनके पास अन्य अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी हैं। हमारे अधिकारी सीमित संसाधनों के बावजूद अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन काम में तेजी लाने और जनता को शुद्ध खाद्य सामग्री सुनिश्चित करने के लिए हमें तत्काल अतिरिक्त स्टाफ और संसाधनों की आवश्यकता है।”

निष्कर्ष और आगे का रास्ता (Conclusion & Outlook)

त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों में मिलावट एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या है जो सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन से जुड़ी हुई है। लुधियाना में चार अधिकारियों और एक वाहन के सहारे मिलावटखोरी के खिलाफ जंग लड़ना प्रशासन की लचर व्यवस्था को उजागर करता है। यदि समय रहते राज्य सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए और खाद्य सुरक्षा विभाग को पर्याप्त बल, वाहन और आधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं कराए, तो मिलावटखोरों के हौसले और अधिक बुलंद होंगे। जनता की सेहत के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को रोकने के लिए सरकार को तुरंत प्रभाव से नए पदों का सृजन करना चाहिए और फील्ड स्टाफ की संख्या बढ़ानी चाहिए ताकि त्योहारों के इस पावन अवसर पर हर नागरिक तक शुद्ध और सुरक्षित भोजन पहुंच सके।

Translate »
error: Content is protected !!