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हिमाचल सदन में ‘वंदे मातरम्’ पर टकराव, हंगामे के बाद शनिवार तक कार्यवाही स्थगित

हिमाचल।राजवीर दीक्षित

(Clash over ‘Vande Mataram’ in Himachal Sadan; proceedings adjourned until Saturday following an uproar)हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बारहवें सत्र का आगाज शुक्रवार को राष्ट्रगान के साथ हुआ, लेकिन शुरुआत के कुछ ही देर बाद सदन का माहौल गरमा गया। मानसून सत्र के पहले दिन वंदे मातरम् को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। विपक्षी विधायकों ने सदन की कार्यवाही शुरू होने पर राष्ट्रगीत वंदे मातरम् नहीं गाए जाने को लेकर आपत्ति जताई।
मामले पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् से जुड़ा कानून विधानसभा पर लागू नहीं होता, बल्कि सरकारी संस्थानों के लिए बनाया गया है। अध्यक्ष के इस स्पष्टीकरण के बाद विपक्षी विधायक और अधिक आक्रामक हो गए और सदन में विरोध शुरू कर दिया।
हंगामा बढ़ता देख अध्यक्ष ने पूर्व विधायकों के निधन पर शोकोद्गार की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही और सदस्यों से सदन की परंपराओं का पालन करने की अपील की। पठानिया ने कहा कि विधानसभा की परंपरा के अनुसार सत्र की शुरुआत राष्ट्रगान से होती है, जबकि वंदे मातरम् का गायन समापन के समय किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की नई परंपरा शुरू करना उचित नहीं होगा।
विपक्ष के लगातार विरोध के बीच अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही स्थगित करने की चेतावनी दी। जब हंगामा नहीं थमा तो उन्होंने विधानसभा की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी।
वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक दल विपक्ष के रवैये के विरोध में नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर निकला। सत्ता पक्ष के विधायकों ने विपक्ष पर राष्ट्रगान का अपमान करने का आरोप लगाया। इस तरह मानसून सत्र का पहला दिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के बजाय राजनीतिक टकराव और हंगामे की भेंट चढ़ गया।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंत्रियों और विभागों को मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के संभावित हमलों का प्रभावी जवाब देने के लिए पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल और शून्यकाल में उठने वाले सवालों के जवाब तथ्यों, आंकड़ों और ठोस जानकारी के आधार पर दिए जाएं, ताकि सरकार अपना पक्ष मजबूती से सदन में रख सके।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष से भी आग्रह किया कि वह सदन में तथ्यों के साथ अपनी बात रखे। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में पहली बार 10 दिनों का विधानसभा सत्र आयोजित किया जा रहा है। सुक्खू ने नेता प्रतिपक्ष और विपक्षी सदस्यों से कहा कि वे विरोध करें और जरूरत पड़ने पर वॉकआउट भी करें, लेकिन सदन में सरकार को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी माहौल के बीच सोशल मीडिया में सुर्खियों में बने रहने के लिए विपक्ष सदन में अनावश्यक हंगामा कर सकता है, इसलिए सरकार को हर मुद्दे पर तथ्यों के साथ जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा।
मानसून सत्र में सत्तापक्ष पूरी तैयारी के साथ उतरेगा
मानसून सत्र शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक आयोजित हुई। बैठक में सत्र के दौरान विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवालों और संभावित हमलों को लेकर सरकार की रणनीति पर विस्तार से मंथन किया गया। मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों और विधायकों को निर्देश दिए कि वे विपक्ष के हर सवाल का जवाब ठोस तथ्यों और पूरी तैयारी के साथ दें। बैठक में उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार समेत पार्टी के विधायक मौजूद रहे। इस दौरान सत्र में उठने वाले प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करते हुए सरकार की ओर से सदन में प्रभावी तरीके से पक्ष रखने की रणनीति को अंतिम रूप दिया गया।
भाजपा के निशाने पर राजनीतिक प्रतिशोध, भ्रष्टाचार समेत कई मुद्दे
शिमला में शुक्रवार से विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। सत्र से ठीक पहले गुरुवार शाम नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में भाजपा विधायक दल की अहम बैठक हुई। बैठक में मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने और सदन में आक्रामक तरीके से अपनी बात रखने की रणनीति तैयार की गई। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और प्रदेश से जुड़े अहम मुद्दों को देखते हुए भाजपा इस बार सरकार पर दबाव बनाने के लिए पूरी तैयारी के साथ सदन में उतरने जा रही है।भाजपा विधायक दल की ओर से कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार के आरोप, कर्मचारियों व पेंशनरों की लंबित मांगें, बेरोजगारी, किसानों से जुड़े मुद्दे, आपदा राहत एवं पुनर्वास कार्य और कांग्रेस की चुनावी गारंटियों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी है। विपक्ष का आरोप है कि कांग्रेस सरकार चुनाव के दौरान किए गए कई वादों को जमीन पर उतारने में नाकाम रही है। भाजपा इन मुद्दों के जरिए सरकार की कार्यप्रणाली, वित्तीय स्थिति और विकास कार्यों को लेकर सदन में जवाब मांगेगी।
मानसून सत्र की शुरुआत से ही विधानसभा में सियासी माहौल गरमाने के संकेत मिल रहे हैं। एफआईआर और पूछताछ से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष की ओर से स्थगन प्रस्ताव लाए जाने की संभावना है, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हो सकती है। वहीं, प्रश्नकाल के दौरान सरकार को घेरने की कोशिश में विपक्ष तीखे सवाल उठा सकता है, ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों से सहयोग की अपेक्षा जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर विधानसभा सत्र की अवधि बढ़ाई जा सकती है। पठानिया ने यह भी कहा कि सदन में सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाएगा।

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