शिमला । राजवीर दीक्षित
(Cobra venom so potent, even medication proved ineffective! 2 deaths in Himachal) हिमाचल प्रदेश में ईरानी कोबरा के काटने से दो लोगों की मौत के मामले सामने आए हैं। दोनों घटनाएं सुबह के वक्त हुईं। डॉक्टर ओमेश भारती के अनुसार, ठंडे और ऊंचाई वाले इलाकों में सांप सुबह के समय धूप सेंकने के लिए बाहर निकलते हैं। इसी दौरान अनजाने में सांप पर पैर पड़ने से उसने दोनों लोगों को डस लिया।
बताया जा रहा है कि इसी दौरान दोनों लोग ईरानी कोबरा के संपर्क में आ गए। यह प्रजाति सामान्यतः इंसानी बस्तियों से दूर रहती है और तब तक हमला नहीं करती, जब तक उसे किसी तरह का खतरा महसूस न हो। अचानक सामने आने या छेड़े जाने की स्थिति में यह काट सकती है।
चंबा में ईरानी कोबरा के जहर ने दो जिंदगियां छीन लीं। एक पीड़ित की सांप के डसने के करीब 30 मिनट बाद ही मौत हो गई, जबकि दूसरा तीन दिन तक जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा। भारत में इस प्रजाति के सांप के डसने से मौत का यह पहला रिपोर्टेड मामला बताया जा रहा है।
सेब के बगीचे में मौत बनकर आया सांप, डसने के बाद इलाज में देरी से गई जान
सेब के बगीचे में रोजमर्रा के काम के लिए निकला 40 वर्षीय व्यक्ति उस दिन मौत के ऐसे जाल में फंस गया, जिसका अंदाजा शायद किसी को नहीं था। 6 जुलाई 2020 की सुबह उल्लांसा गांव में कीटनाशक का छिड़काव करते समय उसका पैर सांप पर पड़ गया। सांप ने उसके पैर में दो बार डस लिया।
सर्पदंश के बाद जब सांस लेने में दिक्कत शुरू हुई तो तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत थी। लेकिन परिवार पहले उसे अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने पहुंच गया। समय बीतता गया और हालत गंभीर होती गई। तीसरे दिन जब उसे सिविल अस्पताल भरमौर लाया गया, डॉक्टरों ने उसे मृत पाया।
चुराह घाटी में जहरीले सांप का कहर, 62 वर्षीय व्यक्ति की दर्दनाक मौत
सुबह का वक्त था और 62 वर्षीय व्यक्ति रोज की तरह काम के लिए निकला था, लेकिन रास्ते में हुई एक छोटी-सी चूक जानलेवा साबित हुई। अनजाने में पैर ईरानी कोबरा पर पड़ते ही सांप ने बाएं पैर में डस लिया। जहर का असर तेजी से बढ़ा और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी हालत गंभीर हो गई। सिविल अस्पताल तीसा में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
एंटी स्नेक वेनम की क्षमता पर उठे सवाल
भारत में इस्तेमाल होने वाला एंटी स्नेक वेनम मुख्य रूप से चार प्रमुख जहरीले सांपों—चश्माधारी कोबरा, रसेल वाइपर, कॉमन करैत और सॉ-स्केल्ड वाइपर—के जहर के खिलाफ तैयार किया जाता है। लेकिन कैस्पियन कोबरा का जहर इनसे काफी अलग बताया गया है। शोध के मुताबिक, मौजूदा एंटी स्नेक वेनम इसके जहर को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय करने में सक्षम नहीं हो सकता।
दो लोगों ने बताया जड़ी-बूटी से बचाव का अनुभव, अब वैज्ञानिक जांच की दरकार
रिपोर्ट में सांप के डसने से बचने वाले दो लोगों का भी जिक्र किया गया है। दोनों ने दावा किया कि स्थानीय जड़ी-बूटी ‘मिरचाड़ी’ के इस्तेमाल के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ। शोधकर्ताओं ने इस पौधे की पहचान Pergularia daemia के रूप में की है। हालांकि, अभी तक वैज्ञानिक तौर पर यह साबित नहीं हुआ है कि यह पौधा सांप के जहर को निष्क्रिय या कम करने में सक्षम है। इसके औषधीय प्रभावों को समझने के लिए विस्तृत शोध की जरूरत है।
सांप के डसने पर झाड़-फूंक नहीं, तुरंत इलाज जरूरी! देरी पड़ सकती है भारी
शोधकर्ताओं ने लोगों को आगाह किया है कि सांप के काटने की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों के भरोसे समय बर्बाद न करें। पीड़ित को तुरंत नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाना बेहद जरूरी है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी कोबरा सामान्य परिस्थितियों में इंसानों से दूरी बनाए रखता है, लेकिन खतरा महसूस होने पर हमला कर सकता है। यह सांप ऊंचाई वाले इलाकों और खुले पथरीले क्षेत्रों में पाया जाता है। विशेषज्ञों ने स्थानीय लोगों को सांप की पहचान, बचाव और प्राथमिक सावधानियों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया है।



















