टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दुनिया की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध और गहरे होते विभाजन ने संयुक्त राष्ट्र (UN) को पंगु बना दिया है। गुटेरेस ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की सीधे तौर पर संघर्षों में भागीदारी ने अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने की प्रक्रिया को बेहद जटिल बना दिया है।
दण्डमुक्ति का बढ़ता माहौल
महासचिव ने इस बात पर जोर दिया कि प्रमुख शक्तियों की निष्क्रियता या उनके द्वारा अपने हितों को प्राथमिकता देने से एक खतरनाक ‘दण्डमुक्ति’ (impunity) का वातावरण तैयार हो रहा है। गुटेरेस के अनुसार, इस स्थिति का सीधा असर मध्यम दर्जे की शक्तियों पर पड़ रहा है।
दण्डमुक्ति का यह माहौल यह संदेश दे रहा है कि मध्यम दर्जे की शक्तियां भी अब यह मानकर चल रही हैं कि वे जो चाहे कर सकती हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं होगी।
सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल
गुटेरेस ने स्वीकार किया कि सुरक्षा परिषद के भीतर बढ़ता ध्रुवीकरण वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। जब दुनिया की महाशक्तियां ही अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने के बजाय अपने भू-राजनीतिक हितों को साधने में जुटी हों, तो संयुक्त राष्ट्र के लिए शांति स्थापित करना लगभग असंभव हो जाता है।
प्रमुख बिंदु:
- सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की भूमिका पर गंभीर सवाल।
- वैश्विक स्तर पर जवाबदेही का अभाव और दण्डमुक्ति की संस्कृति।
- मध्यम दर्जे की शक्तियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी।
- बहुपक्षीय सहयोग में भारी गिरावट और बढ़ता हुआ वैश्विक तनाव।
विशेषज्ञों का मानना है कि गुटेरेस की यह टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए एक चेतावनी है। यदि संयुक्त राष्ट्र अपनी प्रासंगिकता बनाए रखना चाहता है, तो उसे अपनी कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन करने की आवश्यकता है, अन्यथा वैश्विक अराजकता का खतरा और बढ़ जाएगा।



















