टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: अक्सर लोग पीठ दर्द को उम्र बढ़ने का एक सामान्य लक्षण मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे का मुख्य कारण हमारी जीवनशैली और गलत शारीरिक मुद्राएं हैं। निखिल जगतदार के अनुसार, हम जिस तरह से उठते, बैठते और चलते हैं, उसका सीधा असर हमारी रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है।
उम्र का भ्रम और गलत धारणाएं
ज्यादातर लोग पीठ दर्द को ‘बुढ़ापे की समस्या’ मानकर इसे स्वीकार कर लेते हैं। हालांकि, आधुनिक शोध बताते हैं कि पीठ दर्द का सीधा संबंध उम्र से नहीं, बल्कि हमारे दैनिक मूवमेंट पैटर्न से है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने या गलत तरीके से भारी सामान उठाने जैसी आदतें रीढ़ की मांसपेशियों पर अनावश्यक दबाव डालती हैं, जो धीरे-धीरे दर्द का रूप ले लेती हैं।
व्यक्तिगत व्यायाम का महत्व
एक ही तरह की एक्सरसाइज हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं हो सकती। विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि पीठ दर्द के समाधान के लिए ‘जेनेरिक’ या सामान्य व्यायाम के बजाय व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार एक्सरसाइज प्लान तैयार करना चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, पुरानी कमर दर्द के प्रबंधन में शिक्षा और आत्म-देखभाल (सेल्फ-केयर) सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। सही जानकारी और जागरूकता के जरिए इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
बचाव के लिए मुख्य सुझाव
- पोस्चर में सुधार: काम के दौरान अपनी बैठने की स्थिति पर ध्यान दें और हर 30 मिनट में ब्रेक लें।
- विशेषज्ञ की सलाह: दर्द होने पर खुद से दवा लेने के बजाय किसी फिजियोथेरेपिस्ट से अपनी शारीरिक बनावट के अनुसार व्यायाम समझें।
- नियमित स्ट्रेचिंग: मांसपेशियों के लचीलेपन को बनाए रखने के लिए रोजाना हल्की स्ट्रेचिंग करें।
- जागरूकता: अपने शरीर के संकेतों को समझें और दर्द को नजरअंदाज न करें।
निष्कर्ष यह है कि पीठ दर्द को उम्र का अनिवार्य हिस्सा मानने के बजाय, हमें अपनी जीवनशैली में सुधार और सही शारीरिक गतिविधियों को अपनाने की आवश्यकता है।



















