Home Himachal Pradesh पार्वती टनल में अचानक रिसाव, सड़क पर लगा लंबा जाम; पर्यटक फंसे

पार्वती टनल में अचानक रिसाव, सड़क पर लगा लंबा जाम; पर्यटक फंसे

कुल्लू । राजवीर दीक्षित

(Sudden leakage in Parvati Tunnel; long traffic jam on the road; tourists stranded) पार्वती हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट स्टेज-II की ADIT-V टनल से हो रही लीकेज के विरोध में किए जा रहे प्रदर्शनों के कारण सैंज घाटी में सड़क यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। प्रदर्शन के चलते सिउंड-भटखंडा सड़क बंद हो गई, जिससे भटखंडा में बड़ी संख्या में पर्यटक कई दिनों से फंसे हुए हैं। वहीं, टनल में लीकेज की मरम्मत का काम भी रुका हुआ है।
फंसे हुए पर्यटकों में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, असम और तमिलनाडु से आए लोग शामिल हैं। ये सभी 18 सितंबर को सैंज घाटी की खूबसूरत वादियों में घूमने और एक बच्चे का जन्मदिन मनाने के लिए यहां पहुंचे थे। परिवार ने सोचा था कि पहाड़ों की खूबसूरती के बीच बच्चे का जन्मदिन यादगार बनाया जाएगा, लेकिन हालात ने उनकी पूरी योजना बदल दी।

19 सितंबर को सिउंड-भटखंडा सड़क बंद होने के बाद इन पर्यटकों की यात्रा मुश्किल में बदल गई। जिस सफर की शुरुआत खुशी, घूमने और जश्न के साथ हुई थी, वही अब सड़क खुलने के इंतजार में बदल गया है।

कई दिनों से रास्ता बाधित होने के कारण पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ टनल की मरम्मत का काम भी रुका हुआ है, जिससे समस्या के जल्द समाधान को लेकर चिंता बनी हुई है।
रिसाव ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और अब सड़क खोलने को लेकर भी गतिरोध खड़ा हो गया है। प्रभावित ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने सड़क को फिर से खोलने से साफ इनकार कर दिया है। उनकी मांग है कि पहले रिसाव से हुए नुकसान का निष्पक्ष और सही आकलन किया जाए और मुआवज़े को लेकर लिखित समझौता किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ सड़क खोल देना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि प्रभावित लोगों के नुकसान की भरपाई भी सुनिश्चित करनी होगी। यही वजह है कि अधिकारी मौके से मलबा हटाने और यातायात बहाल करने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं।

लंबे समय से जारी नाकेबंदी ने पर्यटकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात ऐसे हैं कि कई पर्यटकों का यात्रा बजट खत्म हो चुका है, जबकि उनकी गाड़ियां रास्ते में फंसी हुई हैं। जयपुर निवासी पर्यटक भानु प्रताप ने बताया कि इस अनिश्चितता का असर अब उनके बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ने लगा है।

सफर पर निकले थे, लेकिन अब घर वापसी ही सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
तुरंत रास्ता साफ होने की उम्मीद न देखते हुए कई पर्यटक अपनी गाड़ियां वहीं छोड़कर टैक्सी के जरिए घर लौटने का विकल्प तलाश रहे हैं।

इस नाकेबंदी की मार सिर्फ पर्यटकों तक सीमित नहीं है। स्थानीय पर्यटन कारोबार भी इसकी भारी कीमत चुका रहा है। होमस्टे संचालक लिखित राम और बालमकुंड के मुताबिक, लगातार बुकिंग कैंसिल हो रही हैं और उन्हें लाखों रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। पर्यटन सीजन में आई यह रुकावट अब रोजी-रोटी पर भी भारी पड़ती नजर आ रही है।

सिउंड-रेला रोड के बंद रहने से क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है और अब इसका असर कृषि-बागवानी क्षेत्र पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। क्षेत्र में सेब, फल और सब्जियों का परिवहन सड़क मार्ग पर निर्भर होने के कारण लंबे समय तक मार्ग बंद रहने से किसानों और बागवानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

स्थिति को देखते हुए प्रशासन प्रभावित निवासियों और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के बीच समन्वय स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। बंजार के SDM पंकज शर्मा ने बताया कि स्थिति का आकलन करने तथा मुआवजे और सड़क बहाली से जुड़े मुद्दों पर विचार करने के लिए कमेटी की बैठक बुलाई गई है।

प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के अनुसार, वाल्व हाउस में आवश्यक मरम्मत कार्य पूरा करना सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी है। प्रबंधन का कहना है कि जब तक सुरक्षा से जुड़े जरूरी इंतजाम पूरे नहीं हो जाते, तब तक कामकाज बहाल करना उचित नहीं होगा।

NHPC ने अपने बयान में स्थानीय समुदाय की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया है। कंपनी के अनुसार, मुआवजे को लेकर स्वतंत्र कमेटी की सिफारिशों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

वहीं, लंबे समय से सड़क बंद रहने के कारण स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। स्कूली बच्चों की आवाजाही से लेकर मरीजों और आपातकालीन सेवाओं तक पर इसका असर पड़ रहा है।
अब प्रशासन के सामने चुनौती दोहरी है—एक तरफ सुरक्षा सुनिश्चित करना और दूसरी तरफ प्रभावित लोगों की परेशानी को जल्द कम करना।

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