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हिमाचल में नशीली दवाओं के खिलाफ जागा जनसैलाब, संकल्प रथ यात्रा बनी आवाज

सोलन । राजवीर दीक्षित

(A massive public outcry against drugs has surged in Himachal; the ‘Sankalp Rath Yatra’ has become the voice of this movement) शुक्रवार को गवर्नर कविंदर गुप्ता ने नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान ‘संकल्प रथ यात्रा’ की शुरुआत की। यह अभियान ‘उतिष्ठ भारत सेवा ट्रस्ट’ की ओर से आयोजित किया गया है, जिसका मकसद युवा पीढ़ी को नशीली दवाओं के सेवन से बचाना और समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता पैदा करना है। इस मौके पर गवर्नर ने लोगों से नशे के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ने और युवाओं को सुरक्षित भविष्य देने के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की।

गवर्नर कविंदर गुप्ता ने इस पहल को एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश बताते हुए कहा कि कसौली अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और सैन्य विरासत के लिए जाना जाता है। ऐसे में इस इलाके की पहचान नशीली दवाओं के बजाय पर्यटन और अपनी खूबसूरती के लिए होनी चाहिए। उन्होंने पर्यटन स्थलों और सीमा से सटे क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि नशीली दवाओं की तस्करी का असर युवाओं और क्षेत्र के सामाजिक ताने-बाने पर न पड़े।

गुप्ता ने कहा कि युवाओं पर नशीली दवाओं के दुरुपयोग का असर बेहद चिंताजनक है। उन्होंने माता-पिता और शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों के व्यवहार में होने वाले छोटे-बड़े बदलावों पर ध्यान दें। बच्चों को केवल डांटने या रोकने के बजाय उनकी बात धैर्यपूर्वक सुनना और समझना जरूरी है, ताकि वे अपनी परेशानियां परिवार के साथ साझा कर सकें और गलत संगत या नशे की ओर जाने से बच सकें।

उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं का दुरुपयोग केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौती है। इसका असर केवल नशा करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार, समाज और युवाओं के भविष्य तक पहुंचता है। इस समस्या से निपटने के लिए जहां एक तरफ तस्करों और संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ नशे की लत से प्रभावित लोगों के इलाज, पुनर्वास और उन्हें दोबारा समाज की मुख्यधारा में लाने के प्रयास भी उतने ही जरूरी हैं।

गवर्नर ने नशीली दवाओं की तस्करी और संगठित अपराध के बीच संभावित संबंध का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में नशे की तस्करी सीमा-पार नेटवर्क से भी जुड़ी हो सकती है, जिसके कारण यह सिर्फ सामाजिक समस्या नहीं बल्कि आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय हित से जुड़ा विषय भी बन जाता है।

उन्होंने नशे के खिलाफ पुलिस, सुरक्षा बलों, प्रशासन और जांच एजेंसियों की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सिर्फ सरकारी कार्रवाई से इस समस्या को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। परिवार, स्कूल, धार्मिक संस्थाएं, युवा संगठन और नागरिक समाज मिलकर इस अभियान को मजबूत कर सकते हैं।

गुप्ता ने स्कूलों की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि स्कूलों में नियमित काउंसलिंग, खेल, योग और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही छात्रों के लिए स्किल डेवलपमेंट और उनके साथ सकारात्मक बातचीत पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्कूलों को ड्रग्स के दुरुपयोग के खिलाफ सुरक्षा की पहली पंक्ति के रूप में काम करना चाहिए।

उन्होंने कसौली के कैंटोनमेंट बोर्ड, सेना के जवानों और विभिन्न संस्थानों से भी इस अभियान में सक्रिय योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सेना और सैन्य संस्थानों के अनुभव, अनुशासन और जागरूकता को इस सामाजिक अभियान से जोड़ा जा सकता है।

गवर्नर ने धार्मिक और आध्यात्मिक संगठनों, महिला समूहों, युवा संगठनों, शिक्षण संस्थानों और नागरिक समाज से भी नशे के खिलाफ इस मुहिम में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

युवाओं को संबोधित करते हुए गवर्नर ने उनसे नशीली दवाओं को ‘ना’ कहने की अपील की। उन्होंने युवाओं से अपनी ऊर्जा और प्रतिभा को खेल, योग, शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और राष्ट्र निर्माण की दिशा में लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की सकारात्मक ऊर्जा को सही दिशा देकर समाज को मजबूत बनाया जा सकता है।

इस दौरान गवर्नर ने समाज के लिए उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में सांसद सुरेश कश्यप, विधायक विनोद सुल्तानपुरी, सेंट मैरी स्कूल की प्रिंसिपल सिस्टर टेस्विन समेत कई अन्य प्रमुख लोग मौजूद रहे।

नशे के खिलाफ इस अभियान का संदेश साफ है—युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए सिर्फ कानून नहीं, बल्कि परिवार का भरोसा, स्कूल की जिम्मेदारी और पूरे समाज की भागीदारी जरूरी है।

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