नई दिल्ली। टारगेट न्यूज नेटवर्क
(No impact of new fees on UPI! RBI Governor says transaction pace will remain steady) UPI के चुनिंदा ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होने के बावजूद डिजिटल पेमेंट की रफ्तार पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि छोटी फीस से UPI ट्रांजैक्शन की संख्या में खास कमी आने की उम्मीद नहीं है।
मॉनिटरी पॉलिसी के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मल्होत्रा ने कहा कि अब तक UPI ट्रांजैक्शन की संख्या में कोई कमी देखने को नहीं मिली है। उनके मुताबिक, मामूली शुल्क से डिजिटल पेमेंट के इस्तेमाल पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है।
15 अक्टूबर से चुनिंदा पेमेंट पर MDR
15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट्स के लिए MDR लागू होगा। सामान्य ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क 0.4 प्रतिशत तक बताया गया है। वहीं, ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है।
रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि से जुड़े कुछ कम मार्जिन वाले सेक्टरों के लिए ₹2,000 से अधिक के पेमेंट पर ₹5 प्रति ट्रांजैक्शन का फ्लैट MDR लागू होगा।
P2P UPI रहेगा पूरी तरह फ्री
म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से जुड़े UPI ट्रांजैक्शन पर 0.02 प्रतिशत MDR का प्रावधान है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी।
वहीं पर्सन-टू-पर्सन (P2P) UPI ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, चाहे रकम कितनी भी हो।
ग्राहक पर नहीं पड़ेगा फीस का बोझ
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक MDR का भुगतान मर्चेंट की ओर से किया जाएगा। यह राशि सरकार के पास नहीं जाएगी और इसका बोझ सीधे ग्राहक पर डालने का प्रावधान नहीं है।
RBI गवर्नर के बयान से साफ संकेत है कि चुनिंदा UPI पेमेंट पर MDR लागू होने के बावजूद डिजिटल भुगतान की तेज रफ्तार पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।

















