Home Business UPI चार्ज पर ब्रेक? फेस्टिव सीजन में पेमेंट रह सकता है फ्री

UPI चार्ज पर ब्रेक? फेस्टिव सीजन में पेमेंट रह सकता है फ्री

नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित 

(A halt to UPI charges? Payments may remain free during the festive season) UPI यूजर्स और कारोबारियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR लागू करने की तय तारीख 15 अक्टूबर से आगे खिसक सकती है। PTI के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इसे अगले साल 1 जनवरी तक टालने पर विचार कर रही है। हालांकि, अंतिम फैसला अभी आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं हुआ है।

अगर तारीख आगे बढ़ती है तो फेस्टिव सीजन के दौरान कारोबारियों और पेमेंट कंपनियों को बड़ी राहत मिल सकती है और प्रस्तावित MDR लागू नहीं होगा। सरकार की ओर से अंतिम फैसला आने वाले दिनों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।

पेटीएम समेत फिनटेक शेयरों पर दबाव

UPI MDR को लेकर चल रही खबरों के बीच फिनटेक कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। रिपोर्ट के मुताबिक पेटीएम, मोबिक्विक, पाइन लैब्स और NPST जैसे शेयरों पर दबाव रहा।

पेटीएम का शेयर कारोबार के दौरान करीब 10% तक गिरकर ₹1,561 के स्तर तक पहुंचा और बाद में करीब 5.42% की गिरावट के साथ ₹1,640 पर बंद हुआ। मोबिक्विक करीब 4.57%, पाइन लैब्स 4.39% और NPST 3.39% की गिरावट के साथ बंद हुए।

₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर प्रस्तावित MDR

मौजूदा अधिसूचित ढांचे के अनुसार, ₹2,000 से ज्यादा के पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI पेमेंट पर 0.4% MDR लगाया जाना है। ₹75,000 या उससे ज्यादा के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा।

ग्राहकों से यह शुल्क सीधे नहीं लिया जाना है। वहीं ₹2,000 तक के पात्र मर्चेंट पेमेंट और Person-to-Person ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लगाया जाएगा।

छोटे कारोबारियों को राहत

प्रस्तावित व्यवस्था में पात्र छोटे कारोबारियों के लिए अलग छूट का प्रावधान है। ₹1 लाख तक के मासिक UPI कलेक्शन वाले छोटे मर्चेंट इस MDR से बाहर रहेंगे। लगातार तीन महीने तय सीमा से ऊपर रहने पर मर्चेंट की कैटेगरी बदलने का प्रावधान भी बताया गया है।

कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए अलग फ्लैट शुल्क का प्रावधान है, जबकि सामान्य मर्चेंट लेनदेन में 0.4% MDR की व्यवस्था है।

सरकार के फैसले पर टिकी नजर

UPI MDR की नई व्यवस्था को लेकर कारोबारियों और डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री में पहले से चर्चा चल रही है। फिलहाल 15 अक्टूबर की तारीख आगे बढ़ेगी या नहीं, इस पर अंतिम सरकारी फैसला बाकी है। इसलिए इसे अभी संभावित बदलाव के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

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