चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब के पठानकोट में 91.75 एकड़ जमीन पर कथित अवैध खनन से जुड़े 500 करोड़ रुपये के पंचायत भूमि घोटाले की जांच तेज कर दी है। पिछले दो दिनों में एजेंसी के अधिकारियों ने मोहाली स्थित ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के मुख्यालय का दौरा किया और कथित अनियमितताओं से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए।
एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, ED ने जुलाई में पठानकोट में 16 ठिकानों पर छापेमारी के दौरान बेहिसाब 1.75 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की थी। ये तलाशी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कथित अवैध खनन और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास शामलात जमीन के हस्तांतरण की जांच के सिलसिले में की गई थी। जिन परिसरों की तलाशी ली गई, उनमें विजय कुमार कटारूचक का आवास और कार्यालय भी शामिल था। उन्हें राज्य के कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक का करीबी माना जाता है।
यह जांच पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की ओर से दर्ज FIR पर आधारित है। मामला पठानकोट जिले की गोल गांव पंचायत के अंतर्गत भटियां गांव में सामूहिक भूमि से कथित तौर पर अवैध रूप से रेत और नदी तल की सामग्री निकालने से संबंधित है।
ED का आरोप है कि खनिज संपदा से भरपूर इस जमीन को तत्कालीन अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) कुलदीप सिंह द्वारा उनकी सेवानिवृत्ति से कुछ समय पहले जारी आदेश के जरिए निजी व्यक्तियों को हस्तांतरित कर दिया गया था। एजेंसी का यह भी दावा है कि एक मंत्री की सिफारिश पर कुलदीप सिंह को सेवानिवृत्ति से महज चार दिन पहले पठानकोट में ADC (ग्रामीण विकास) नियुक्त किया गया था और उन्होंने रिटायरमेंट से एक दिन पहले विवादित आदेश जारी किया था।
ED ने बताया कि तलाशी के दौरान ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जो कथित अवैध खनन से जुड़े हो सकते हैं। जांचकर्ताओं को संदेह है कि स्टोन क्रशर कंपनियों ने आवश्यक अनुमति लिए बिना और टैक्स व रॉयल्टी का भुगतान किए बगैर रेत तथा नदी तल की सामग्री की खुदाई, खरीद-बिक्री और ढुलाई की। इससे राज्य के राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
एजेंसी को मोहाली के पपरी गांव में 46 कनाल शामलात जमीन को निजी रियल एस्टेट कंपनी जनता लैंड प्रमोटर्स लिमिटेड को बेचे जाने से संबंधित दस्तावेज भी मिले हैं। मामले की जांच अभी जारी है।


















