बैजनाथ।राजवीर दीक्षित
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की निचली पहाड़ियों में जंगली जानवरों का रिहायशी इलाकों की ओर रुख करना ग्रामीणों के लिए खतरा बनता जा रहा है। बुधवार को बैजनाथ उपमंडल के उत्तराला क्षेत्र के नैन गांव के पास एक जंगली भालू ने युवक पर अचानक हमला कर दिया। हमले में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर कई चोटें आई हैं।
घायल की पहचान करोट गांव निवासी पंजाब सिंह के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह किसी काम से नैन गांव के पास जा रहा था। इसी दौरान घनी झाड़ियों से अचानक निकले भालू ने उस पर हमला कर दिया। भालू के हमले से वह बुरी तरह घायल हो गया। स्थानीय लोगों की मदद से उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है।
घटना के बाद वन विभाग ने भी मामले का संज्ञान लिया है। रेंज ऑफिसर दीपक कुमार ने बताया कि घायल व्यक्ति को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके अलावा उसके इलाज पर आने वाला खर्च भी वन विभाग की ओर से वहन किया जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर इंसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव को लेकर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जंगलों में प्राकृतिक भोजन और चारे की उपलब्धता कम होने के कारण भालू, तेंदुए और जंगली सूअर जैसे जानवर भोजन की तलाश में निचले इलाकों और आबादी के करीब पहुंच रहे हैं।
गांवों के आसपास जंगलों के छोटे हिस्से, बगीचे और खेत होने के कारण लोगों का जंगली जानवरों से सामना होने का खतरा बना रहता है। खेतों में काम करने, पशुओं के लिए चारा लाने और गांव के रास्तों से गुजरने वाले लोग अचानक हमलों की चपेट में आ सकते हैं।
पर्यावरण में बदलाव, प्राकृतिक आवासों का सिमटना, जंगलों के संसाधनों में कमी और वन्यजीवों के आवागमन वाले रास्तों पर मानवीय दखल भी ऐसे संघर्ष को बढ़ा सकते हैं। वहीं, आबादी के आसपास भोजन की उपलब्धता जंगली जानवरों को गांवों की ओर आकर्षित कर सकती है।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग से संवेदनशील जंगलों और रास्तों पर निगरानी बढ़ाने, ग्रामीणों को जागरूक करने और जंगली जानवरों से बचाव के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों में प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता बढ़ाने और वन्यजीवों के आवासों को सुरक्षित रखने की दिशा में भी काम होना चाहिए।
नैन गांव के पास हुआ भालू का यह हमला एक बार फिर सवाल खड़ा कर रहा है कि आखिर ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे। अब जरूरत ऐसी रणनीति की है, जिससे इंसानों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

















