ऊना। सत्यदेव शर्मा
(Battle for credit over BBMB victory! Parties must unite for Chandigarh’s rights: Sahore) भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के बिजली हिस्सेदारी विवाद में हिमाचल प्रदेश को मिली ऐतिहासिक सफलता के बाद अब राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ पर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व जिला परिषद सदस्य पंकज सहोड़ ने कहा कि यह उपलब्धि किसी एक सरकार या राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि वर्षों के सामूहिक संघर्ष और लगातार की गई कानूनी पैरवी का परिणाम है।
सहोड़ ने प्रदेश के सभी पूर्व और वर्तमान मुख्यमंत्रियों को इस सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा कि हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई को अलग-अलग सरकारों ने अपने-अपने कार्यकाल में आगे बढ़ाया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल, स्वर्गीय वीरभद्र सिंह और जयराम ठाकुर के योगदान का विशेष उल्लेख किया।

राजनीतिक श्रेय की होड़ पर उठाए सवाल
पंकज सहोड़ ने कहा कि मौजूदा सरकार द्वारा इस सफलता का पूरा श्रेय स्वयं लेने की कोशिश उचित नहीं है। हर उपलब्धि को अपनी सरकार की उपलब्धि बताने से इतिहास नहीं बदलता। हिमाचल की जनता जानती है कि प्रदेश के अधिकारों की इस लंबी लड़ाई में किस सरकार और नेता ने कब क्या योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि सभी पूर्व और वर्तमान सरकारों के प्रयासों को उचित सम्मान मिलना चाहिए। प्रदेशहित के मुद्दों को राजनीतिक लाभ और श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा से ऊपर रखा जाना जरूरी है।
अब चंडीगढ़ में 7.19% हिस्सेदारी के लिए लड़ें सभी दल
सहोड़ ने अब चंडीगढ़ में हिमाचल प्रदेश की 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिकार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने प्रदेश सरकार, विपक्ष और सभी राजनीतिक दलों से इस मांग पर एकजुट होकर प्रयास करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि इस अधिकार को हासिल करने के लिए मजबूत कानूनी पैरवी, राजनीतिक इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयासों की जरूरत है। सभी दलों को एक मंच पर आकर प्रदेश का पक्ष मजबूती से रखना चाहिए।
हिमाचल का हक किसी की कृपा नहीं
पंकज सहोड़ ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के अधिकार किसी की कृपा नहीं, बल्कि उसका न्यायसंगत हक हैं। प्रदेश के स्वाभिमान, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखना होगा।
उन्होंने कहा कि BBMB की सफलता से यह संदेश मिला है कि लंबे संघर्ष और सामूहिक प्रयासों से प्रदेश अपने अधिकार हासिल कर सकता है। अब चंडीगढ़ की हिस्सेदारी के मुद्दे पर भी इसी एकजुटता और दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है।













