द टारगेट न्यूज़:
चंडीगढ़ के राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने आदित्य बिड़ला कैपिटल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील को खारिज करते हुए बीमा कंपनी को एक शिकायतकर्ता को 5.18 लाख रुपये ब्याज, मुआवजे और मुकदमे के खर्च के साथ वापस करने के आदेश को बरकरार रखा है। यह फैसला 27 अक्टूबर 2026 को पीठासीन सदस्य पद्मा पांडे और सदस्य राजेश के. आर्य की पीठ द्वारा सुनाया गया। शिकायतकर्ता सौरभ कपूर, जो चंडीगढ़ के निवासी हैं, ने अपने वकील ध्रुव शर्मा के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई थी कि बीमा कंपनी ने 2012 के पुराने मेडिकल इतिहास का कथित रूप से खुलासा न करने के आधार पर उनके मेडिकल रीइंबर्समेंट के दावे को खारिज कर दिया था। कपूर ने पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ और उसके बाद मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, मोहाली में इलाज कराया था और भारी मेडिकल खर्च उठाया था। सभी दस्तावेज जमा करने के बावजूद बीमा कंपनी ने क्लेम खारिज कर पॉलिसी रद्द कर दी थी। जिला उपभोक्ता आयोग ने पहले शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को 5,18,589 रुपये, 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक उत्पीड़न के लिए 20,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 10,000 रुपये देने का निर्देश दिया था। साथ ही प्रीमियम भुगतान के अधीन पॉलिसी को बहाल करने के भी निर्देश दिए थे। इस आदेश को चुनौती देते हुए बीमा कंपनी ने राज्य आयोग का रुख किया था। अपील को खारिज करते हुए राज्य आयोग ने पाया कि कथित मेडिकल इतिहास 1 अप्रैल 2021 को पॉलिसी शुरू होने से आठ साल से अधिक पुराना था और यह पॉलिसी के तहत पूर्व-मौजूदा बीमारी को परिभाषित करने के लिए निर्धारित 48 महीने की संविदात्मक अवधि से बाहर था। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी 2012 की बीमारी और 2023 में निदान की गई बीमारी के बीच एक निश्चित संबंध स्थापित करने के लिए ठोस मेडिकल साक्ष्य पेश करने में विफल रही। इलाज करने वाले डॉक्टर के मेडिकल प्रमाण पत्र से भी यह साबित नहीं हुआ कि पुरानी स्थिति जारी रही थी। आयोग ने माना कि बिना किसी ठोस मेडिकल साक्ष्य के केवल एक पुरानी चिकित्सीय घटना के आधार पर किसी वास्तविक बीमा दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। आयोग ने अपील को गुणदोषहीन पाते हुए खारिज कर दिया और पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ तथा मैक्स अस्पताल मोहाली में हुए मेडिकल खर्च के रीइंबर्समेंट व पॉलिसी के नवीनीकरण के आदेश को सही ठहराया।













