चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Big action by the BJP government in Bengal! All nominated officials appointed during the Mamata government dismissed”) पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने बड़े प्रशासनिक बदलावों की शुरुआत कर दी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में कई बड़े और सख्त फैसले लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। सरकार ने ऐलान किया है कि ममता बनर्जी सरकार के दौरान राज्य के गैर-संवैधानिक बोर्डों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) और विभिन्न संस्थाओं में नियुक्त सभी नामित सदस्यों, चेयरमैनों और निदेशकों का कार्यकाल तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाएगा।
इतना ही नहीं, 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु पार करने के बाद सेवा विस्तार या पुनर्नियुक्ति पर काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं भी तुरंत खत्म करने का आदेश जारी कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए उठाया गया है।
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कई अहम घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने के लिए BSF को फेंसिंग हेतु जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी। इसके अलावा राज्य में केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं जैसे ‘आयुष्मान भारत’ को लागू करने का भी फैसला लिया गया है।
नई सरकार ने कानून व्यवस्था में बदलाव करते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू करने का निर्णय लिया है, जिसे पिछली सरकार ने रोक रखा था। वहीं सरकारी स्कूलों में नौकरी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को बड़ी राहत देते हुए आयु सीमा में 5 साल की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है।
सरकार के इन फैसलों को पश्चिम बंगाल में ‘प्रशासनिक सफाई अभियान’ और केंद्र के साथ बेहतर तालमेल की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि इन फैसलों का राज्य की राजनीति और प्रशासन पर क्या असर पड़ता है।



















