द टारगेट वेब डेस्क
(Meta Fined ₹5,000 Crore Over Children’s Mental Health) अमेरिका में सोशल मीडिया दिग्गज Meta को बड़ा कानूनी झटका लगा है। न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी Meta पर 567 मिलियन डॉलर (करीब ₹5,000 करोड़) का भारी जुर्माना लगाया है। अदालत का मानना है कि कंपनी के कुछ फीचर्स और नीतियों ने बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाला तथा उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में गंभीर लापरवाही बरती।
अदालत के आदेश के अनुसार, जुर्माने की राशि का बड़ा हिस्सा, लगभग 420 मिलियन डॉलर, बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य उपचार, काउंसलिंग और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किया जाएगा। वहीं शेष राशि अगले पांच वर्षों तक सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता अभियान, रोकथाम कार्यक्रम और स्क्रीनिंग सेवाओं के लिए इस्तेमाल होगी।

इस मामले की सुनवाई के दौरान ज्यूरी ने पाया कि Meta ने ऐसे फीचर्स विकसित किए जो बच्चों को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किए गए थे। आरोप यह भी है कि कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी कुछ गंभीर जानकारियों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित नहीं किया और सुरक्षा उपायों में पर्याप्त सुधार नहीं किए।
अदालत ने Meta को अपने प्लेटफॉर्म में कई बड़े बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। इनमें एज वेरिफिकेशन सिस्टम को और सख्त बनाना, बच्चों के लिए डिफॉल्ट प्राइवेसी सेटिंग्स को मजबूत करना और लत बढ़ाने वाले फीचर्स पर नियंत्रण शामिल है। इन बदलावों का उद्देश्य नाबालिग यूजर्स के लिए सोशल मीडिया को अधिक सुरक्षित बनाना है।
इस पूरे विवाद के बीच Meta के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने बच्चों से जुड़े कंटेंट और सुरक्षा प्रबंधन में हुई कमियों पर खेद व्यक्त किया है। वहीं भारत सरकार भी पहले स्पष्ट कर चुकी है कि Meta सहित सभी सोशल मीडिया कंपनियों को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
यह फैसला दुनिया भर की टेक कंपनियों के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि यूजर्स, खासकर बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह की लापरवाही अब भारी पड़ सकती है। आने वाले समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर और सख्त नियम लागू होने की संभावना भी जताई जा रही है।



















