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CJI की नोएडा मजिस्ट्रेट को कड़ी फटकार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद नोटिस क्यों?

नई दिल्ली। टारगेट न्यूज नेटवर्क 

(CJI sharply reprimands Noida Magistrate: Why was a notice issued despite the Supreme Court’s order?) छात्र प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी FIR रद्द करने और छात्रों के खिलाफ भविष्य में जबरन कार्रवाई पर रोक लगा चुका है, तो फिर एक छात्र को नोटिस जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी।

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी मजिस्ट्रेट सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला मजिस्ट्रेट से जवाब मांगने की बात कही है।

छात्र को 5 लाख के बॉन्ड का नोटिस

मामला 4 सितंबर को जारी किए गए एक नोटिस से जुड़ा है। नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट आरके सिसोदिया के कार्यालय से छात्र अक्षत त्रिपाठी को BNSS की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया था।

नोटिस में छात्र से पूछा गया था कि उसे छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए पाबंद क्यों न किया जाए। इसके लिए 5 लाख रुपये का निजी बॉन्ड और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने को कहा गया था।

प्रदर्शन में शामिल होने पर कार्रवाई का आरोप

नोटिस में आरोप लगाया गया था कि अक्षत त्रिपाठी विश्वविद्यालय के छात्रों को CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। साथ ही उन पर सरकार विरोधी और भ्रामक सूचनाएं फैलाने का आरोप लगाया गया था।

नोटिस के मुताबिक, ऐसी गतिविधियों से तनाव पैदा होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी। मामले में सुनवाई के लिए 5 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया मामला

छात्र ने बाद में एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उसे प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर डराया जा रहा है।

बुधवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वजीत भट्टाचार्य ने यह मामला CJI की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने उठाया। उन्होंने कहा कि नोटिस जारी करना सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना का विषय है।

अदालत को बताया गया कि बाद में संबंधित नोटिस वापस ले लिया गया। इसके बावजूद वकील ने मामले को गंभीर बताते हुए अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए।

अक्षत त्रिपाठी कौन हैं?

अक्षत त्रिपाठी प्रयागराज के झूंसी के रहने वाले हैं और गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय से BA-LLB की पढ़ाई कर रहे हैं। वह SFI की उत्तर प्रदेश स्टेट कमेटी के सदस्य भी बताए गए हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद नोएडा के अधिकारियों की कार्रवाई पर जवाबदेही तय होने की संभावना है। अदालत ने संकेत दिया है कि इस पूरे मामले को लेकर जिला मजिस्ट्रेट से जवाब मांगा जाएगा।

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