चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(Crackdown on adulterated paneer; menus must specify ‘which paneer’) खाने-पीने की चीजों में मिलावट पर लगाम लगाने के लिए चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग के फूड सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन (FSA) ने होटल, रेस्तरां, ढाबों और अन्य फूड बिजनेस संचालकों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं।
अब ग्राहकों से पनीर के नाम पर कुछ भी छिपाया नहीं जा सकेगा। खाने में इस्तेमाल होने वाले पनीर या पनीर जैसे उत्पाद की किस्म स्पष्ट रूप से मेन्यू कार्ड, रेट लिस्ट और डिस्प्ले बोर्ड पर बतानी होगी।
चार तरह के पनीर की देनी होगी जानकारी
FSA के निर्देशों के मुताबिक प्रतिष्ठानों को यह बताना होगा कि उनके खाने में कौन सा उत्पाद इस्तेमाल हो रहा है। इसमें स्टैंडर्ड पनीर, मीडियम-फैट पनीर, लो-फैट पनीर या डेयरी एनालॉग शामिल हैं।
डेयरी एनालॉग में वेजिटेबल फैट का इस्तेमाल हो सकता है। ऐसे में ग्राहक को पहले से स्पष्ट जानकारी देने के लिए इसका अलग से उल्लेख करना जरूरी होगा।
मेन्यू के साथ बोर्ड पर भी लिखना होगा
होटल, रेस्तरां, फास्ट-फूड आउटलेट, ढाबे, मिठाई की दुकानें, कैटरर्स और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों को मेन्यू या रेट लिस्ट में पनीर का प्रकार दर्ज करना होगा।
इसके अलावा परिसर में ऐसी जगह डिस्प्ले बोर्ड लगाना होगा, जहां ग्राहक आसानी से जानकारी देख सकें।
पनीर कहां से आया, देना होगा हिसाब
FSA ने कारोबारियों को पनीर, दूध और अन्य कच्चा माल केवल FSSAI लाइसेंस प्राप्त या पंजीकृत सप्लायर से खरीदने के निर्देश दिए हैं।
खरीद के बिल और इनवॉइस भी सुरक्षित रखने होंगे। रिकॉर्ड में बैच नंबर, निर्माण तिथि, बेस्ट-बिफोर डेट और सप्लायर का FSSAI लाइसेंस नंबर दर्ज होना चाहिए।
रिकॉर्ड नहीं मिला तो कार्रवाई
फूड सेफ्टी अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान खरीद संबंधी दस्तावेजों की जांच की जा सकती है। नियमों का पालन नहीं मिलने पर सैंपलिंग, सामान जब्ती, इम्प्रूवमेंट नोटिस और कानूनी कार्रवाई तक की जा सकती है।
ग्राहकों से भी सतर्क रहने की अपील
विभाग ने शहरवासियों से भी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। किसी प्रतिष्ठान में घटिया या असुरक्षित दूध उत्पादों की बिक्री, निर्माण या सप्लाई की जानकारी मिलने पर विभाग को शिकायत करने को कहा गया है।
यानी अब चंडीगढ़ में पनीर के नाम पर क्या परोसा जा रहा है, इसकी जानकारी ग्राहक से छिपाना आसान नहीं होगा।



















