शिमला।राजवीर दीक्षित
हिमाचल प्रदेश के फार्मा उद्योग में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की सितंबर की मासिक अलर्ट सूची में हिमाचल में बनी 95 दवाओं के सैंपल शामिल किए गए। इनमें से 70 सैंपल महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जबकि 22 में लेबलिंग सहित अन्य छोटी कमियां पाई गईं।
सितंबर की राष्ट्रीय अलर्ट सूची में कुल 330 दवा सैंपल शामिल थे। इनमें से 95 सैंपल हिमाचल प्रदेश की 70 फार्मा इकाइयों में निर्मित थे। इन सैंपलों में 48 टैबलेट, 20 सिरप और सस्पेंशन जैसे ओरल लिक्विड, 14 इंजेक्शन व IV फ्लूइड और पांच कैप्सूल व सॉफ्ट जेल शामिल थे।
जांच में 70 सैंपल में दवा की निर्धारित मात्रा, घुलने की क्षमता और अन्य अहम गुणवत्ता मानकों से जुड़ी खामियां सामने आईं। वहीं, 22 सैंपलों में लेबलिंग से संबंधित कमियों सहित अन्य छोटी गड़बड़ियां मिलीं।
इंजेक्शन में बाहरी कण पाए जाना विशेष रूप से गंभीर माना जाता है, क्योंकि इससे मरीजों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। ऐसे मामलों में दवा की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।
बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र और पांवटा साहिब की फार्मा इकाइयां नियामक एजेंसी की मासिक गुणवत्ता अलर्ट सूची में लगातार शामिल हो रही हैं।
राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर के मुताबिक, नियमों का उल्लंघन करने वाली और बार-बार खामियां दोहराने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई तेज की गई है। वर्ष 2026 में अब तक 46 इकाइयों पर कार्रवाई हुई, जिनमें उत्पादों की मंजूरी निलंबित करना और उत्पादन पूरी तरह या आंशिक रूप से रोकना शामिल है।
तुलना करें तो 2025 में 20 और 2024 में 17 इकाइयों पर कार्रवाई की गई थी। पिछले तीन वर्षों में कुल 96 फार्मा इकाइयों का उत्पादन पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद कराया गया। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही भी शुरू की गई है। हालांकि, अधिकारियों ने संबंधित कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए।
स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार ने कहा कि गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले सैंपलों के अनुपात को राज्य के कुल उत्पादन के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, देश में घरेलू दवा आपूर्ति का करीब 33 प्रतिशत हिस्सा हिमाचल से आता है और राज्य से बड़ी मात्रा में दवाओं का निर्यात भी होता है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अलर्ट में हिमाचल के NSQ यानी गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले सैंपलों की संख्या जुलाई में 239 में से 82 थी। अगस्त में यह 220 में से 64 और सितंबर में 330 में से 95 रही। कुल सैंपलों में इनकी हिस्सेदारी जुलाई के लगभग 34 प्रतिशत से घटकर सितंबर में 28.8 प्रतिशत हुई।
दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल बरकरार हैं। नियामक कार्रवाई के बावजूद बार-बार सामने आ रही खामियां यह सवाल उठाती हैं कि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फार्मा इकाइयों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण को कितना मजबूत किया जा रहा है।


















