Home Adventure News त्रियुंड ट्रेक पर सुविधाओं का विस्तार, पर्यटकों को मिलेगी बड़ी राहत

त्रियुंड ट्रेक पर सुविधाओं का विस्तार, पर्यटकों को मिलेगी बड़ी राहत

धौलाधार रेंज। राजवीर दीक्षित

हिमाचल प्रदेश के मशहूर त्रियुंड ट्रेक पर जाने वाले पर्यटकों के लिए राहत भरी खबर है। वन विभाग करीब 34 लाख रुपये की परियोजना के तहत ट्रेकिंग रूट पर पीने के पानी, बायो-डाइजेस्टर टॉयलेट और बारिश से बचने के लिए शेल्टर बनाने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही धौलाधार की संवेदनशील पहाड़ी पारिस्थितिकी को बचाने के लिए कूड़ा प्रबंधन के नियम भी सख्त किए जा रहे हैं।

प्रस्तावित योजना के तहत धौलाधार रेंज में त्रियुंड से करीब 4 से 5 किलोमीटर आगे स्थित लाका से पाइपलाइन के जरिए पानी त्रियुंड टॉप तक पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा ट्रेक के बीच में तीन और शीर्ष पर तीन, कुल छह बायो-डाइजेस्टर टॉयलेट यूनिट स्थापित करने की योजना है। प्रमुख स्थानों पर गज़ीबो या रेन शेल्टर भी बनाए जाएंगे, ताकि अचानक बारिश और खराब मौसम के दौरान ट्रेकर्स को सुरक्षित जगह मिल सके।

त्रियुंड में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इन सुविधाओं की जरूरत महसूस की जा रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान यहां करीब 77 हजार ट्रेकर्स पहुंचे। वहीं, इस साल अप्रैल से जुलाई के बीच लगभग 33 हजार भारतीय पर्यटकों और 600 विदेशी नागरिकों ने इस पर्यटन स्थल का रुख किया।

पर्यावरण को साफ रखने के लिए वन विभाग ने अगस्त में कूड़ा वापस लाने की व्यवस्था भी शुरू की थी। इसके तहत गालू स्थित वन विभाग के चेक पोस्ट पर ट्रेकर्स को दोबारा इस्तेमाल होने वाले या रिसाइकिल किए जा सकने वाले कूड़े के बैग दिए जाते हैं। पर्यटकों को ट्रेक के दौरान पैदा हुआ कचरा वापस लाकर बैग और जमा रसीद अधिकारियों को सौंपनी होती है।

इसके लिए प्रति ट्रेकर 500 रुपये की रिफंडेबल सिक्योरिटी राशि ली जाती है, जो वापसी के समय बैग और रसीद जमा करने पर लौटा दी जाती है।

डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर अमित शर्मा ने कहा कि विभाग का उद्देश्य पहाड़ों के नाजुक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना ट्रेकर्स को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि धर्मशाला वन सर्कल के अधिक पर्यटकों वाले ट्रेकिंग रूट को स्वच्छ और टिकाऊ बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि दूसरे हिमालयी क्षेत्रों के लिए भी एक उदाहरण पेश किया जा सके।

त्रियुंड के अलावा धर्मशाला वन सर्कल में करेरी, हिमानी चामुंडा, कुंजर महादेव और पालाचक जैसे लोकप्रिय ट्रेकिंग रूट भी हैं। इसके साथ ही बलेनी, मिंकियानी, भीमगसुत्री, इंद्रहार, तालंग, तोरल और जलसू जैसे ऊंचाई वाले पहाड़ी दर्रों के ट्रेक भी इस क्षेत्र का हिस्सा हैं।

वन विभाग की प्रस्तावित योजना और कूड़ा प्रबंधन के सख्त उपायों का मकसद ट्रेकिंग को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना है, ताकि पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही के बीच धौलाधार की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सके।

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