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5 बार विधायक, 2 बार मंत्री… अब नहीं रहे मेजर मनकोटिया, हिमाचल में शोक की लहर

धर्मशाला । राजवीर दीक्षित

(Five-time MLA, two-time minister… Major Mankotia passes away; wave of grief in Himachal) हिमाचल प्रदेश की राजनीति के दिग्गज नेता और शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे मेजर विजय सिंह मनकोटिया का 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है। मेजर मनकोटिया करीब चार दशक तक हिमाचल की राजनीति में सक्रिय रहे और इस दौरान उन्होंने विधायक से लेकर मंत्री तक की जिम्मेदारी संभाली।

मेजर मनकोटिया ने 1982 में पहली बार शाहपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने शाहपुर का कई बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया। वह हिमाचल सरकार में दो बार मंत्री भी रहे।

एक सैनिक से राजनेता तक का उनका सफर बेहद खास रहा। लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने शाहपुर की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। उनके निधन को हिमाचल की राजनीति के एक लंबे और महत्वपूर्ण अध्याय का अंत माना जा रहा है।

वीरभद्र सिंह से सियासी टकराव, मनकोटिया के आरोपों ने मचाई थी हलचल

हिमाचल की राजनीति में वीरभद्र सिंह और विजय सिंह मनकोटिया के बीच सियासी टकराव किसी से छिपा नहीं था। प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह के खिलाफ मनकोटिया ने भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। इसी दौरान सामने आए चर्चित सीडी कांड ने हिमाचल की राजनीति में भूचाल ला दिया था। लंबे समय तक यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना रहा। हालांकि बाद में मामले में कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया और विवाद धीरे-धीरे ठंडा पड़ गया।

सियासत में लंबा सफर, कई दलों के टिकट पर आजमाई किस्मत

मनकोटिया का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक करियर में कांग्रेस के अलावा जनता दल, बसपा और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमाई। कई मौकों पर उन्होंने जीत दर्ज कर विधानसभा तक का सफर तय किया। साल 1985 में मनकोटिया कांग्रेस में शामिल हुए। इसके बाद उनकी राजनीतिक पहचान लगातार मजबूत होती गई। वर्ष 1995 में उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की कैबिनेट में जगह मिली। यह उनके राजनीतिक करियर का एक अहम पड़ाव माना गया।
हालांकि, इसके बाद भी उनकी राजनीतिक राह हमेशा आसान नहीं रही। वर्ष 2007 में उन्होंने बसपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। चुनावी हार के बाद उन्होंने दोबारा कांग्रेस का रुख किया।
इसके बाद वर्ष 2012 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार भी जीत हासिल नहीं कर सके। इसी दौर में उन्हें हिमाचल पर्यटन बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया गया। इस तरह मनकोटिया के राजनीतिक सफर में चुनावी जीत-हार के साथ-साथ संगठन और सरकार में जिम्मेदारियों का सिलसिला भी चलता रहा।

टिकट कटा तो निर्दलीय मैदान में उतरे, फिर बदला सियासी रास्ता

कांग्रेस की ओर से टिकट नहीं मिलने और केवल सिंह पठानिया को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने पार्टी से अलग राह पकड़ ली। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई। उस समय राजनीतिक गलियारों में उनके आम आदमी पार्टी में जाने की चर्चाएं भी थीं। हालांकि, इन अटकलों के बीच उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दिया और उनके राजनीतिक सफर को एक नया मोड़ दिया।

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