शिमला । राजवीर दीक्षित
(No promotion for IAS officers without an exam? Knowledge of the Gita and cybersecurity to be tested) हिमाचल प्रदेश में अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों की पदोन्नति और वार्षिक कार्य निष्पादन मूल्यांकन से जुड़ी व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब अधिकारियों को प्रशासनिक कार्यों के साथ निर्धारित प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का अध्ययन भी करना होगा। इसके लिए आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर उपलब्ध ऑनलाइन कोर्स पूरे करने और व्यापक मूल्यांकन परीक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने की शर्त निर्धारित की गई है। परीक्षा के परिणाम को अधिकारियों की वार्षिक कार्य निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट यानी एपीएआर से जोड़ा गया है, जिससे प्रशिक्षण और परीक्षा में प्रदर्शन का असर उनके सेवा संबंधी मूल्यांकन तथा पदोन्नति पर पड़ेगा।
भारत सरकार के अवर सचिव गौरव आनंद द्वारा जारी आदेश को हिमाचल प्रदेश के कार्मिक विभाग के विशेष सचिव राजीव कुमार ने प्रदेश के संबंधित अधिकारियों को अनुपालन के लिए जारी किया है। आदेश के अनुसार विभिन्न सेवा स्तरों के अधिकारियों के लिए कम से कम छह पाठ्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। इनमें से 50 प्रतिशत पाठ्यक्रम पूरे करने के बाद ही अधिकारी व्यापक मूल्यांकन परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक आवश्यक होंगे। हालांकि परीक्षा में असफल रहने वाले अधिकारियों के लिए दोबारा प्रयास करने की संख्या सीमित नहीं की गई है।
इस व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि परीक्षा परिणाम सीधे स्पैरो पोर्टल के माध्यम से संबंधित अधिकारी की एपीएआर में दर्ज होगा। इससे प्रशिक्षण और मूल्यांकन प्रक्रिया को डिजिटल प्रणाली से जोड़ने में मदद मिलेगी। साथ ही अधिकारियों के ज्ञान, तकनीकी दक्षता और प्रशासनिक क्षमता को उनके नियमित सेवा मूल्यांकन का हिस्सा बनाया जा सकेगा।
पाठ्यक्रमों का निर्धारण अधिकारियों की वरिष्ठता और जिम्मेदारियों के अनुसार किया गया है। 25 वर्ष से अधिक सेवा वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के लिए एआई रणनीति, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और भगवद्गीता से नेतृत्व के पाठ शामिल किए गए हैं। मध्यम स्तर के अधिकारियों को साइबर रक्षक, शासन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल और परिवर्तन प्रबंधन से संबंधित पाठ्यक्रम पढ़ने होंगे। इसी तरह निचले स्तर के कर्मचारियों के लिए डिजिटल कौशल, तनाव प्रबंधन और सोशल मीडिया के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग जैसे विषय निर्धारित किए गए हैं।
विशेषज्ञों के दृष्टिकोण से देखें तो प्रशासनिक सेवाओं में निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। साइबर अपराध, डिजिटल सेवाओं और तकनीक आधारित शासन की चुनौतियों के बीच अधिकारियों का नए विषयों से परिचित होना महत्वपूर्ण है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य अधिकारियों को केवल पारंपरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं तक सीमित रखने के बजाय आधुनिक शासन व्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना माना जा सकता है।


















