धर्मशाला । राजवीर दीक्षित
(Manimahesh ‘Chhari’ Procession: Major relief for J&K vehicles; no Green Tax to be paid) चंबा प्रशासन ने जम्मू-कश्मीर के डोडा और भद्रवाह से पवित्र छड़ी जुलूस के साथ मणिमहेश यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत दी है। प्रशासन ने तीर्थयात्रियों की गाड़ियों पर लगने वाला ग्रीन टैक्स माफ कर दिया है। यह फैसला डिप्टी कमिश्नर मुकेश रेपस्वाल और मणिमहेश ट्रस्ट, डोडा के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के बाद लिया गया।प्रशासन के इस निर्णय से छड़ी जुलूस के साथ आने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान आर्थिक राहत मिलेगी।
भद्रवाह में मणिमहेश की आस्था, हर साल हजारों परिवार करते हैं यात्रा
जगदीश ठाकुर ने कहा कि डोडा जिले के भद्रवाह इलाके में मणिमहेश को हिंदू समुदाय के प्रमुख देवता के रूप में पूजा जाता है। उन्होंने बताया कि हर साल क्षेत्र के हजारों परिवार मणिमहेश यात्रा में शामिल होते हैं। इनमें भद्रवाह, डोडा, रामबन, बनी समेत आसपास के इलाकों के श्रद्धालु शामिल रहते हैं।
ठाकुर ने मणिमहेश यात्रा की पुरानी परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि पहले श्रद्धालु पैदल ही पवित्र झील तक जाते थे और कई भक्त नंगे पैर यात्रा पूरी करते थे। हालांकि सड़क संपर्क बेहतर होने के बाद वाहनों से यात्रा करने वालों की संख्या बढ़ी है, लेकिन कुछ श्रद्धालु आज भी पैदल यात्रा की परंपरा निभा रहे हैं। राधाष्टमी के दिन मणिमहेश झील में पवित्र स्नान के साथ यात्रा का समापन होता है। उन्होंने DC से ‘छड़ी’ जुलूस के वाहनों को ग्रीन टैक्स से छूट देने का अनुरोध किया।
मणिमहेश यात्रा पर श्रद्धालुओं को राहत, J&K से आने वाले छड़ी जुलूस को ग्रीन टैक्स से छूट
मणिमहेश यात्रा को लेकर प्रशासन ने बड़ा राहत भरा फैसला लिया है। जम्मू-कश्मीर से आने वाले ‘छड़ी’ जुलूस के साथ आने वाले वाहनों से ग्रीन टैक्स नहीं वसूला जाएगा। DC ने कहा कि धार्मिक यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा।
भरमौर में ग्रीन टैक्स से बड़ी राहत, ‘छड़ी’ जुलूस को मिली छूट
मणिमहेश यात्रा के बीच चंबा प्रशासन ने जम्मू-कश्मीर से आने वाले ‘छड़ी’ जुलूस के वाहनों को ग्रीन टैक्स से राहत देने का फैसला किया है।
गौरतलब है कि अगस्त से भरमौर सब-डिविजन में आने वाले वाहनों पर ग्रीन टैक्स लिया जा रहा है। टू-व्हीलर के लिए ₹50, कार के लिए ₹100, SUV/MUV के लिए ₹300 और बस के लिए ₹500 शुल्क निर्धारित है।
प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था पर्यावरण संरक्षण और बढ़ती आवाजाही से उत्पन्न दबाव को संभालने के लिए संसाधन जुटाने के उद्देश्य से लागू की गई थी। वहीं, मणिमहेश यात्रा में जम्मू-कश्मीर से आने वाले श्रद्धालुओं की भी अहम भागीदारी रहती है।



















