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कालका-शिमला टॉय ट्रेन में बड़ा बदलाव! अब डीजल नहीं, ग्रीन एनर्जी से दौड़ने की तैयारी!

शिमला।राजवीर दीक्षित

यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल ऐतिहासिक कालका-शिमला रेलवे लाइन अब पर्यावरण अनुकूल रेल सफर की नई मिसाल बनने की तैयारी में है। केंद्र सरकार इस विरासत मार्ग पर हाइड्रोजन से चलने वाली टॉय ट्रेन शुरू करने की योजना पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य प्रदूषण कम करने के साथ शिवालिक की पहाड़ियों में पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देना है।

यह पहल केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके तहत देश के चुनिंदा ऐतिहासिक रेल मार्गों पर हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें शुरू करने की योजना है। डीजल इंजन के विपरीत हाइड्रोजन ट्रेन फ्यूल सेल तकनीक से बिजली पैदा करती है, जिसमें मुख्य उप-उत्पाद पानी होता है। इससे वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है।

रेलवे ने कालका-शिमला रेल मार्ग का सर्वे पूरा कर लिया है। इस परियोजना के लिए बारोग रेलवे स्टेशन पर हाइड्रोजन ईंधन संयंत्र स्थापित करने के लिए जगह भी चिह्नित की गई है।

उत्तर रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना को वर्ष 2024-25 की योजनाओं में शामिल किया गया था। तकनीकी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ट्रेन का ट्रायल रन प्रस्तावित है। हालांकि, इसके संचालन के लिए रेल मंत्रालय की मंजूरी और तकनीकी व्यवहार्यता सुनिश्चित होना जरूरी है।

120 साल से अधिक पुराने इस रेल मार्ग पर हाइड्रोजन तकनीक लागू करना आसान नहीं होगा। पहाड़ी इलाका, तीखे ढलान, सुरंगें और विशिष्ट रेल संरचना इसके लिए विशेष इंजीनियरिंग समाधान की मांग करते हैं। ऐसे में बारोग में प्रस्तावित हाइड्रोजन प्लांट इस परियोजना के लिए अहम भूमिका निभाएगा।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ योजना के तहत 35 हाइड्रोजन ट्रेनों के संचालन की योजना घोषित की थी, जिसमें कालका-शिमला रेल मार्ग भी शामिल था। वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर इस ऐतिहासिक ट्रैक पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की मांग की थी।

कालका-शिमला रेलवे लाइन का निर्माण 1898 से 1903 के बीच ब्रिटिश शासनकाल में हुआ था। करीब 96 किलोमीटर लंबे इस रेल मार्ग पर 103 सुरंगें और 900 से अधिक पुल हैं। शिवालिक पहाड़ियों के खूबसूरत नजारों से गुजरने वाला यह मार्ग देश के प्रमुख विरासत रेल मार्गों में गिना जाता है।

जुलाई 2008 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। अब प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना साकार होती है तो यह ऐतिहासिक रेल मार्ग स्वच्छ और आधुनिक रेल परिवहन की दिशा में नया कदम बढ़ा सकता है।

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