शिमला । राजवीर दीक्षित
Major political deliberations in Himachal! JP Nadda to review highway projects; the Bilaspur meeting holds deep significance) हिमाचल प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक ऐसी हलचल देखने को मिल रही है, जिसने सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा की हिमाचल प्रदेश के विकास कार्यों को लेकर लगातार बढ़ती सक्रियता अब सिर्फ प्रशासनिक गतिविधि नहीं रह गई है, बल्कि इसके राजनीतिक मायनों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विभागीय सीमाओं से आगे बढ़कर हिमाचल के बुनियादी ढांचे और खास तौर पर प्रमुख हाईवे परियोजनाओं की प्रगति पर नड्डा की सीधी नजर को प्रदेश की सियासत में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
नड्डा की इस सक्रियता ने सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए पैदा की है, क्योंकि हिमाचल प्रदेश उनकी राजनीतिक कर्मभूमि और गृहक्षेत्र रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके जेपी नड्डा प्रदेश की राजनीति की रग-रग से वाकिफ हैं। संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और राष्ट्रीय स्तर पर लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण हिमाचल भाजपा के भीतर उन्हें हमेशा एक प्रभावशाली और सर्वमान्य नेतृत्व के तौर पर देखा गया है। यही वजह है कि जब भी भाजपा के भविष्य के नेतृत्व और मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरों की चर्चा होती है, तो नड्डा का नाम भी प्रमुखता से सामने आता रहा है।
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नड्डा की हिमाचल में बढ़ती सक्रियता को केवल विकास परियोजनाओं की समीक्षा तक सीमित करके देखा जाए, या इसके पीछे कोई व्यापक राजनीतिक संदेश भी छिपा हुआ है? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र में बेहद महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद हिमाचल के विकास कार्यों में उनकी सीधी दिलचस्पी यह संकेत देती है कि प्रदेश उनके राजनीतिक एजेंडे से बाहर नहीं हुआ है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, 9 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश में चल रही सभी राष्ट्रीय राजमार्ग और एनएचएआई परियोजनाओं की प्रगति को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में राज्य में चल रही प्रमुख सड़क परियोजनाओं की स्थिति, उनकी प्रगति, सामने आ रही अड़चनें और उन्हें समय पर पूरा करने से जुड़े मुद्दों पर समीक्षा की जाएगी।
हालांकि सामान्य तौर पर राष्ट्रीय राजमार्गों और एनएचएआई से जुड़ी परियोजनाओं की समीक्षा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय या संबंधित राज्य के लोक निर्माण विभाग के स्तर पर होती है। ऐसे में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री द्वारा हिमाचल प्रदेश की सभी प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग और एनएचएआई परियोजनाओं की प्रगति की सीधे समीक्षा किया जाना अपने आप में चर्चा का विषय बन गया है।
यही वह बिंदु है, जहां से इस पूरी कवायद के राजनीतिक मायने तलाशे जा रहे हैं। प्रशासनिक तौर पर यह बैठक विकास परियोजनाओं की निगरानी का हिस्सा हो सकती है, लेकिन राजनीतिक तौर पर इसे नड्डा की हिमाचल में सक्रिय भूमिका और प्रदेश के विकास एजेंडे पर उनकी सीधी पकड़ के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सियासी जानकारों का कहना है कि यह केवल एक बैठक नहीं है, बल्कि इसके जरिए कई संदेश एक साथ दिए जा रहे हैं। पहला संदेश यह कि केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी संभालने के बावजूद नड्डा हिमाचल के जमीनी मुद्दों से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। दूसरा संदेश यह कि प्रदेश की महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की प्रगति पर उनकी नजर बनी हुई है। और तीसरा संदेश यह हो सकता है कि हिमाचल के विकास से जुड़े बड़े फैसलों में उनकी भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है।
खास तौर पर बिलासपुर एम्स की बेहतर कनेक्टिविटी से लेकर प्रदेशभर के प्रमुख हाईवे नेटवर्क तक की समीक्षा को इस पूरे घटनाक्रम का अहम हिस्सा माना जा रहा है। बिलासपुर नड्डा के राजनीतिक जीवन से भी गहराई से जुड़ा हुआ क्षेत्र है और ऐसे में एम्स समेत वहां की कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों की समीक्षा को स्वाभाविक तौर पर अतिरिक्त राजनीतिक महत्व मिल रहा है।
नड्डा की सक्रियता को लेकर एक और अहम पहलू यह है कि वह लंबे समय से हिमाचल भाजपा के संगठनात्मक और राजनीतिक समीकरणों से जुड़े रहे हैं। प्रदेश की राजनीति में उनकी स्वीकार्यता और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी भूमिका को देखते हुए उनकी गतिविधियों को सामान्य नेताओं की गतिविधियों की तरह नहीं देखा जाता। यही कारण है कि विकास परियोजनाओं की समीक्षा जैसी प्रशासनिक कवायद भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन जाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि नड्डा की यह सक्रियता प्रदेश में भाजपा की केंद्रीय भूमिका को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण हो सकती है। हिमाचल की राजनीति में सत्ता पक्ष पर दबाव बनाने, विकास के मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने और संगठन के भीतर अपनी प्रभावी भूमिका को फिर से रेखांकित करने के लिहाज से यह बैठक अहम मानी जा रही है।
हालांकि नड्डा की ओर से इस बैठक को लेकर कोई राजनीतिक दावा सामने नहीं आया है और आधिकारिक तौर पर इसका उद्देश्य विकास परियोजनाओं की समीक्षा ही है, लेकिन राजनीति में सिर्फ आधिकारिक एजेंडा ही पूरी कहानी नहीं बताता। कई बार किसी बैठक की टाइमिंग, उसमें शामिल अधिकारियों का स्तर और उठाए जाने वाले मुद्दे भी अपने आप में कई संकेत छोड़ जाते हैं।
इस बैठक में केंद्र और राज्य स्तर के कई आला अधिकारियों को शामिल होने के लिए बुलाया गया है। इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई के चेयरमैन संतोष कुमार यादव का नाम प्रमुख रूप से शामिल है। इसके अलावा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव, जो हाईवे से जुड़े मामलों को देखते हैं, वह भी बैठक में मौजूद रहेंगे।
एनएचएआई शिमला के क्षेत्रीय अधिकारी एवं महाप्रबंधक (तकनीकी) कर्नल अजय सिंह बारगोटी, बिलासपुर एम्स के कार्यकारी निदेशक और बिलासपुर के उपायुक्त यानी डीसी को भी बैठक में शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव और हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव को भी बैठक की आधिकारिक सूचना भेजी गई है।
अधिकारियों के इस स्तर को देखते हुए साफ है कि बैठक को महज औपचारिक समीक्षा बैठक नहीं माना जा सकता। इतने वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हिमाचल की प्रमुख सड़क परियोजनाओं और कनेक्टिविटी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने वाली है। ऐसे में बैठक से निकलने वाले निर्देश और फैसले आने वाले समय में परियोजनाओं की गति पर असर डाल सकते हैं।
दूसरी तरफ राजनीतिक नजरिए से देखें तो नड्डा की यह सक्रियता भाजपा के भीतर भविष्य के नेतृत्व को लेकर चलने वाली चर्चाओं को भी हवा दे सकती है। मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरों को लेकर जब भी राजनीतिक चर्चाएं तेज होती हैं, नड्डा का नाम उन नेताओं में शामिल रहता है जिनकी राष्ट्रीय और प्रदेश दोनों स्तरों पर मजबूत पहचान है।
यही वजह है कि अब निगाहें 9 अक्टूबर की इस बैठक पर टिक गई हैं। क्या बैठक में सिर्फ हाईवे और एनएचएआई परियोजनाओं की समीक्षा होगी? क्या बिलासपुर एम्स और उसकी कनेक्टिविटी को लेकर कोई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश सामने आएंगे? क्या हिमाचल की लंबित परियोजनाओं को लेकर केंद्र स्तर पर कोई बड़ा फैसला होगा? और सबसे अहम—क्या इस बैठक के बाद नड्डा की हिमाचल में राजनीतिक सक्रियता और बढ़ती दिखाई देगी?
फिलहाल इतना जरूर है कि नड्डा की बढ़ती सक्रियता ने हिमाचल की सियासत को एक नई चर्चा दे दी है। एक तरफ इसे प्रदेश के विकास से जोड़कर देखा जा रहा है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक जानकार इसमें भविष्य की संभावनाओं के संकेत तलाश रहे हैं।
केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी, हिमाचल में बढ़ती सक्रियता और बिलासपुर से लेकर प्रदेशभर के हाईवे नेटवर्क तक सीधी निगरानी—इन तीनों को एक साथ जोड़कर देखा जाए तो आने वाले दिनों में नड्डा की भूमिका हिमाचल की राजनीति में फिर से चर्चा के केंद्र में रह सकती है। अब देखना यही होगा कि 9 अक्टूबर की यह बैठक केवल विकास परियोजनाओं की समीक्षा बनकर रह जाती है या फिर प्रदेश की सियासी बिसात पर भी इसका कोई बड़ा असर दिखाई देता है।


















