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ओडिशा में पंचायती राज व्यवस्था में उथल-पुथल: दो साल में 74 जनप्रतिनिधि अविश्वास प्रस्ताव से बाहर

ओडिशा में पंचायती राज व्यवस्था में उथल-पुथल: दो साल में 74 जनप्रतिनिधि अविश्वास प्रस्ताव से बाहर

टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: ओडिशा में जमीनी स्तर की राजनीति में पिछले दो वर्षों के भीतर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य में पंचायती राज संस्थानों (PRI) के भीतर सत्ता के समीकरण तेजी से बदले हैं, जिसके परिणामस्वरूप कुल 74 जनप्रतिनिधियों को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए अपने पदों से हाथ धोना पड़ा है।

पद से हटाए गए जनप्रतिनिधियों का आंकड़ा

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 महीनों में अविश्वास प्रस्तावों की बाढ़ सी आ गई है। इस दौरान 61 सरपंचों, चार नायब सरपंचों और नौ पंचायत समिति अध्यक्षों को उनके सहयोगियों और वार्ड सदस्यों के अविश्वास का सामना करना पड़ा और अंततः उन्हें पदमुक्त होना पड़ा। यह स्थिति ग्रामीण स्थानीय निकायों में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता और आंतरिक कलह को दर्शाती है।

अविश्वास प्रस्ताव के पीछे के मुख्य कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि इन अविश्वास प्रस्तावों के पीछे केवल राजनीतिक मतभेद ही नहीं, बल्कि विकास कार्यों में पारदर्शिता की कमी और फंड के वितरण को लेकर उपजे विवाद भी प्रमुख कारण हैं।

स्थानीय निकायों में अविश्वास प्रस्तावों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि जमीनी स्तर पर जवाबदेही की मांग तेज हो गई है। जब वार्ड सदस्य या पंचायत समिति सदस्य अपने नेतृत्व के काम से संतुष्ट नहीं होते, तो वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उपयोग करते हुए उन्हें हटाने का निर्णय लेते हैं।

  • कुल 74 जनप्रतिनिधियों को पद से हटाया गया।
  • प्रभावितों में 61 सरपंच, 4 नायब सरपंच और 9 पंचायत समिति अध्यक्ष शामिल हैं।
  • दो साल की अवधि में राजनीतिक अस्थिरता का यह एक बड़ा उदाहरण है।

ओडिशा के विभिन्न जिलों में यह ट्रेंड देखा जा रहा है, जहां सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच की खींचतान अक्सर पंचायत स्तर पर अविश्वास प्रस्ताव के रूप में सामने आती है। प्रशासन अब इन रिक्त पदों पर उपचुनाव कराने की प्रक्रिया में जुट गया है ताकि ग्रामीण विकास कार्यों में कोई बाधा न आए।

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