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बैसाखी वाले दिन सियासी तूफान ! BBMB नियुक्तियों पर पंजाब बनाम केंद्र आमने-सामने,खाली पद और बड़ा विवाद

चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित

(A political storm on Vaisakhi! Punjab vs Centre face off over Bhakra Beas Management Board appointments — vacant posts spark a major controversy.) केंद्र सरकार द्वारा भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में सदस्य सिंचाई और सदस्य बिजली के पदों को देशभर के अधिकारियों के लिए खोलने के फैसले ने पंजाब में तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। राज्य के मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस कदम को “पंजाब पर हमला” बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।

कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए बैंस ने कहा कि यह निर्णय पंजाब के हितों के खिलाफ है और बोर्ड के कामकाज से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे नियमों से हटकर है।

उन्होंने कहा, “बैसाखी के मौके पर यह बीजेपी की ओर से पंजाब को दिया गया ‘तोहफा’ है। केंद्र सरकार को तुरंत यह फैसला वापस लेना चाहिए, वरना पंजाब के लोग और राज्य सरकार इसके खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे।”

जहां एक ओर केंद्र की अधिसूचना पर लगातार आलोचना हो रही है, वहीं दो महत्वपूर्ण पद—सदस्य सिंचाई और सदस्य बिजली—लंबे समय से खाली पड़े होने के कारण स्थिति और जटिल हो गई है।

सदस्य सिंचाई का पद, जो परंपरागत रूप से हरियाणा के पास रहता था, 9 सितंबर 2020 से खाली है। वहीं सदस्य बिजली का पद, जो पंजाब के लिए निर्धारित था, 26 सितंबर 2022 से रिक्त है।

फिलहाल सदस्य बिजली का अतिरिक्त कार्यभार BBMB में मुख्य अभियंता (जनरेशन) द्वारा संभाला जा रहा है।
पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड इंजीनियर्स एसोसिएशन ने भी इन पदों पर नियुक्ति में देरी पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इन पदों को खाली रखना वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।

एसोसिएशन के प्रवक्ता विनोद गुप्ता ने कहा कि यह स्थिति पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 की धारा 79(2) के विपरीत है, जिसके तहत BBMB का गठन किया गया था।

इंजीनियरों और विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान स्थिति उस स्थापित व्यवस्था से स्पष्ट रूप से अलग है, जिसने दशकों तक BBMB के सुचारू संचालन को सुनिश्चित किया था।

1966 में गठन से लेकर 2022 तक बोर्ड में एक निश्चित प्रणाली अपनाई जाती रही—अध्यक्ष की नियुक्ति केंद्र द्वारा साझेदार राज्यों के बाहर से की जाती थी, जबकि सदस्य सिंचाई हरियाणा से और सदस्य बिजली पंजाब से होता था।
सूत्रों के अनुसार, 2022 में केंद्र द्वारा जारी अधिसूचना, जिसमें इन पदों के लिए पूरे देश से इंजीनियरों को आवेदन की अनुमति दी गई, ने इस संतुलन को बिगाड़ दिया। पंजाब और हरियाणा दोनों ने इस फैसले का विरोध किया, जिससे गतिरोध पैदा हो गया और नियमित नियुक्तियां नहीं हो सकीं।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के मुख्य संरक्षक पदमजीत सिंह ने केंद्र से इस अधिसूचना को स्थगित करने और पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि अस्थायी व्यवस्थाएं बोर्ड के कामकाज को कमजोर कर रही हैं और अंतर-राज्यीय विवादों को बढ़ावा दे रही हैं।

BBMB की स्थापना पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 के तहत की गई थी, जिसका उद्देश्य साझेदार राज्यों—मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश—के बीच नदी जल और बिजली का प्रबंधन करना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब और हरियाणा की बोर्ड में सबसे बड़ी हिस्सेदारी है और संचालन लागत का बड़ा हिस्सा भी यही दोनों राज्य वहन करते हैं।

ऐसे में सदस्य बिजली का पद पंजाब और सदस्य सिंचाई का पद हरियाणा को देने की परंपरा संतुलित प्रतिनिधित्व और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने का माध्यम मानी जाती रही है। आलोचकों का कहना है कि बिना सहमति के इस व्यवस्था में बदलाव करना न केवल अधिनियम की भावना के खिलाफ है, बल्कि सहकारी संघवाद को भी कमजोर करता है।

जल बंटवारे का विवाद पहले ही बढ़ रहा है, ऐसे में BBMB में नियुक्तियों और खाली पदों को लेकर यह नया विवाद अब एक और टकराव का कारण बनता नजर आ रहा है, जिससे पंजाब, हरियाणा और केंद्र सरकार के बीच तनाव और बढ़ सकता है।

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