शिमला । राजवीर दीक्षित
(“Shimla Seal Road Permit Row”) हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सील रोड पर बिना परमिट चल रही गाड़ियों के खिलाफ चलाए गए अभियान ने बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया है। सोमवार को उस समय मामला चर्चा का विषय बन गया जब लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री विक्रमादित्य सिंह की निजी गाड़ी का भी चालान काट दिया गया। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई वकीलों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई, जिन्होंने सील रोड पर बिना परमिट चल रही गाड़ियों को रोककर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
जानकारी के अनुसार, शिमला की सील रोड पर केवल परमिट प्राप्त वाहनों को ही आवाजाही की अनुमति है। हाल ही में सरकार द्वारा परमिट शुल्क में भारी बढ़ोतरी किए जाने और नियमों को सख्ती से लागू करने के बाद वकीलों में नाराजगी देखने को मिल रही थी। इसी विरोध के तहत कई अधिवक्ता शिल्ली चौकी के पास एकत्र हुए और सड़क से गुजरने वाले वाहनों की जांच करवाई।
इसी दौरान मंत्री विक्रमादित्य सिंह की इलेक्ट्रिक कार को भी रोका गया। कार में उनकी माता एवं हिमाचल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रतिभा सिंह भी मौजूद थीं। नियमों के उल्लंघन की शिकायत मिलने पर पुलिस ने वाहन का चालान कर दिया। इतना ही नहीं, एक डीजी रैंक के अधिकारी और अन्य प्रभावशाली लोगों के वाहनों पर भी कार्रवाई की गई।
घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। समर्थक इसे कानून के समक्ष सभी की समानता का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि विपक्ष सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। दूसरी ओर, पुलिस और प्रशासन ने मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से फिलहाल दूरी बनाए रखी है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सील रोड परमिट व्यवस्था को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। अब मंत्री की गाड़ी का चालान कटने के बाद यह मुद्दा केवल यातायात नियमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। पूरे प्रदेश की नजर अब इस मामले पर टिकी हुई है।



















