चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(Punjab’s New Power Meter Rush Sparks Major Crisis)पंजाब में बिजली कनेक्शन से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। नए बिजली मीटर लगवाने के लिए विभिन्न विभागों से ली जाने वाली एन.ओ.सी. (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) की शर्त खत्म होते ही जहां आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद थी, वहीं अब यही फैसला नई परेशानियों की वजह बनता नजर आ रहा है। एन.ओ.सी. की बाध्यता हटते ही बिजली मीटर के लिए आवेदन करने वालों की संख्या में चार गुना तक उछाल दर्ज किया गया है, जिससे पावरकॉम विभाग पर अचानक भारी दबाव बढ़ गया है।
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पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन के सेंट्रल ज़ोन, खासकर लुधियाना जिले और उससे जुड़े शहरी व उप-शहरी इलाकों में अन-अप्रूव्ड कॉलोनियों में रहने वाले लाखों परिवार लंबे समय से नए बिजली कनेक्शन की आस लगाए बैठे थे। पहले नगर निगम, पुड्डा, ग्लाडा और पंचायतों से एन.ओ.सी. लेना एक बड़ी चुनौती था, लेकिन सरकार के हालिया फैसले के बाद लोगों ने बड़ी संख्या में आवेदन करना शुरू कर दिया। आंकड़ों के मुताबिक, जहां पहले महीने में करीब 400 आवेदन आते थे, वहीं अब यह संख्या 2000 के करीब पहुंच गई है।
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हालांकि, विभाग में स्टाफ की भारी कमी के चलते हालात संभालना मुश्किल हो गया है। विभागीय रिपोर्ट बताती है कि तमाम प्रयासों के बावजूद सिर्फ 40 प्रतिशत आवेदकों के ही मीटर लग पा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है
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स्थिति को और गंभीर बना रहा है मीटर, तार और लोहे के बॉक्स की कमी। आरोप है कि इसी कमी का फायदा उठाकर कुछ कर्मचारी मीटर लगाने के नाम पर उपभोक्ताओं से 500 से 1000 रुपये तक की अवैध वसूली कर रहे हैं। कुल मिलाकर, राहत देने के उद्देश्य से लिया गया फैसला अब व्यवस्था, संसाधनों और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है।
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