चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित
जॉर्ज कुरियन और रवनीत बिट्टू दोनों का राज्यसभा कार्यकाल एक ही दिन समाप्त हुआ था। बिट्टू राजस्थान से राज्यसभा सांसद थे, जबकि कुरियन मध्य प्रदेश से उच्च सदन के सदस्य थे। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में दोनों नेताओं को दोबारा नामित नहीं किया गया।
इसके बावजूद रवनीत बिट्टू को मंत्री पद पर बनाए रखने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि अगले वर्ष होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा किसी भी तरह का गलत राजनीतिक संदेश नहीं देना चाहती। बिट्टू पंजाब में जाट सिख समुदाय के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं और पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक भूमिका निभाते हैं।
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार कोई भी व्यक्ति सांसद न होने के बावजूद छह महीने तक केंद्रीय मंत्री बना रह सकता है। ऐसे में बिट्टू फिलहाल अपने मंत्री पद पर बने रह सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति को जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा स्वीकार करने की सलाह दी थी, लेकिन रवनीत बिट्टू के मामले में ऐसी कोई सिफारिश नहीं भेजी गई। इससे संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा नेतृत्व अभी भी पंजाब की राजनीति में बिट्टू को अहम मान रहा है और आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए उन पर भरोसा कायम रखा गया है।



















