Home Legal PNB में 78 लाख की ठगी, आरोपी को 3 साल की सजा

PNB में 78 लाख की ठगी, आरोपी को 3 साल की सजा

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित 

(Rs 78 lakh fraud at PNB: Accused sentenced to 3 years in jail) मोहाली की अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में फर्जी पहचान और दस्तावेजों के जरिए खाता खोलकर 78 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में आरोपी संदीप सिंह को दोषी ठहराया है। अदालत ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप में उसे 3 साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने यह भी कहा कि मामले में जनता का पैसा शामिल है, इसलिए प्रोसिक्यूशन विभाग को घोटाले की अन्य कड़ियों और संभावित संदिग्धों की गहन जांच करनी चाहिए।

मार्च 2017 में दर्ज हुई शिकायत
मामला PNB की सेक्टर-71 मोहाली शाखा से जुड़ा है। तत्कालीन शाखा प्रबंधक सुरेंद्र कुमार शर्मा की शिकायत पर थाना मटौर में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया।

नरिंदर सिंह बनकर खोला खाता
12 अक्टूबर 2016 को संदीप सिंह बैंक पहुंचा और खुद को सोहाना, मोहाली निवासी नरिंदर सिंह बताया। उसने फर्जी PAN कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस के जरिए बैंक खाता खुलवाया।

78 लाख का फर्जी चेक जमा
26 अक्टूबर को खाते में 78 लाख रुपये का चेक जमा किया गया। यह चेक गोरखपुर की PNB शाखा के कारोबारी अशोक कुमार सिंह के खाते से जुड़ा था। बैंक की प्रारंभिक जांच के बाद चेक क्लियर हो गया और रकम खाते में पहुंच गई।

अगले ही दिन 66 लाख कैश निकाला
रकम जमा होने के अगले दिन, 27 अक्टूबर को आरोपी ने बैंक से 66 लाख रुपये नकद निकाल लिए। इसके अलावा कार्ड और अन्य माध्यमों से भी खाते में लेनदेन किया गया।

असली खाताधारक ने खोला फर्जीवाड़ा
26 दिसंबर 2016 को गोरखपुर शाखा ने मोहाली बैंक से संपर्क किया। असली खाताधारक अशोक कुमार सिंह ने साफ किया कि उन्होंने 78 लाख रुपये का कोई चेक जारी नहीं किया था। जांच में सामने आया कि जिस चेक नंबर से रकम ट्रांसफर हुई, वह चेक असल में उनकी चेकबुक में मौजूद था।

फर्जी पहचान के पीछे संदीप सिंह निकला
पुलिस जांच में आरोपी की पहचान पठानकोट निवासी संदीप सिंह के रूप में हुई। जांच में यह भी सामने आया कि उसके द्वारा इस्तेमाल किया गया ड्राइविंग लाइसेंस संबंधित RTA के रिकॉर्ड में मौजूद नहीं था।

बैंक के अंदरूनी नेटवर्क पर भी सवाल
जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी के पास असली खाताधारक के खाते, चेक नंबर और हस्ताक्षर से जुड़ी गोपनीय जानकारी थी। अदालत ने माना कि इस जानकारी तक पहुंचने में बैंक के किसी अंदरूनी व्यक्ति की संभावित मिलीभगत की जांच जरूरी है। इसी वजह से अदालत ने प्रोसिक्यूशन विभाग को मामले की आगे की कड़ियों और अन्य संदिग्धों की गहन जांच के निर्देश दिए हैं।

Translate »
error: Content is protected !!