RBI के नए नियमों से डॉलर की मांग पर लगाम
रुपये को सहारा देने के लिए RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। सोमवार को केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा हेजिंग से जुड़े नकद जमा नियमों का दायरा बढ़ाते हुए बैंकों की अपनी परिसंपत्तियों और देनदारियों से जुड़े लेनदेन को भी इसमें शामिल किया।
इन कदमों का उद्देश्य डॉलर की मांग को नियंत्रित करना और रुपये पर पड़ रहे दबाव को कम करना है। इससे पहले RBI सट्टेबाजी वाले कारोबार पर अंकुश लगाने और सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर खरीद को स्पॉट मार्केट से दूर रखने के प्रयास भी कर चुका है।
महंगा कच्चा तेल बना चुनौती
पिछले सप्ताह रुपया रिकॉर्ड निचले स्तरों के करीब पहुंच गया था। महंगे कच्चे तेल और विदेशी पूंजी की निकासी ने भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ाया था। भारत की तेल आयात पर निर्भरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से डॉलर की मांग बढ़ सकती है।
बाजार में सरकारी बैंकों की ओर से RBI के लिए संभावित डॉलर बिक्री ने भी रुपये को सहारा दिया। केंद्रीय बैंक के नियामकीय कदमों और बाजार में हस्तक्षेप के बीच रुपये में सुधार देखने को मिला।
फॉरवर्ड मार्केट में भी उतार-चढ़ाव
रुपये की मजबूती के बावजूद विदेशी मुद्रा के फॉरवर्ड बाजार में अस्थिरता बनी रही। एक साल की डॉलर-रुपया फॉरवर्ड की अनुमानित यील्ड कारोबार के दौरान 3.62 प्रतिशत से 4.02 प्रतिशत के बीच रही, जबकि पिछला बंद स्तर 3.83 प्रतिशत था।
विशेषज्ञों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि RBI के कदम रुपये को कितनी स्थायी मजबूती दे पाते हैं। कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की पूंजी निकासी और डॉलर की मांग आने वाले दिनों में भारतीय मुद्रा की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे।
















