रूपनगर । राजवीर दीक्षित
पंजाब पुलिस ने सरसा नदी तंत्र में कथित तौर पर जहरीला कचरा डाले जाने के मामले की जांच तेज कर दी है। बुधवार को रोपड़ पुलिस ने सरसा नदी की सहायक भुड्ड नाला के नदी तल में अवैध रूप से कारोबार कर रहे कबाड़ कारोबारियों को नोटिस जारी किए हैं। पुलिस ने इन सभी को जांच में शामिल होने के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, हिमाचल-हरियाणा सीमा के पास स्थित नवानगर और मडाली गांवों में नदी तल से कबाड़ का कारोबार करने वालों को नोटिस दिए गए हैं। भुड्ड नाला हरियाणा के पंचकूला जिले के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन यह सरसा नदी के बड़े जलग्रहण क्षेत्र का हिस्सा है। आगे चलकर सरसा नदी का पानी सतलुज नदी में जाकर मिलता है।
रोपड़ सिटी थाने के एसएचओ पवन कुमार ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि नदी तल के अंदर कबाड़ का कारोबार करते पाए गए सभी लोगों को जांच में शामिल होने के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि जांच शुरू हो चुकी है और नोटिस पाने वालों को रोपड़ में पुलिस के सामने पेश होकर जांच में शामिल होना होगा।
यह जांच आम आदमी पार्टी के विधायक दिनेश चड्ढा की शिकायत पर रोपड़ पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। एफआईआर में सरसा और सतलुज नदियों को कथित तौर पर प्रदूषित करने वाली अज्ञात औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। रोपड़ हेडवर्क्स में बड़ी मात्रा में औद्योगिक कचरा और तैरता हुआ कूड़ा जमा होने के बाद यह मामला सामने आया था, जिससे पंजाब के नदी और नहर नेटवर्क में प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ गई।
हाल ही में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) और पुलिस की जांच टीम ने निरीक्षण किया था। इस दौरान भुड्ड नाला और सरसा नदी की अन्य सहायक धाराओं के किनारे संदिग्ध जहरीले कचरे के कई ढेर मिले। टीम को इस्तेमाल की गई सिरिंज, एक्सपायर दवाइयां और अन्य खतरनाक सामग्री समेत बायोमेडिकल कचरा भी खुले में फेंका हुआ मिला।
अधिकारियों को आशंका है कि भारी बारिश और अचानक आने वाली बाढ़ के दौरान यह कचरा बहकर सरसा नदी में पहुंच सकता है और वहां से सतलुज नदी तक जा सकता है। इससे पर्यावरण के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा पैदा होने की आशंका है। पर्यावरण संबंधी अध्ययनों में भी रोपड़ जिले से गुजरने वाली सरसा और सतलुज नदियों में प्रदूषण को लेकर चिंता जताई जाती रही है। इन नदियों का दूषित पानी आगे पंजाब के बड़े नहर नेटवर्क में पहुंचता है, जिसका इस्तेमाल सिंचाई और पेयजल के लिए किया जाता है।
विधायक दिनेश चड्ढा ने बताया कि पंचकूला के डिप्टी कमिश्नर ने उन्हें जानकारी दी है कि क्षेत्र के नालों में अवैध रूप से कारोबार कर रहे कबाड़ कारोबारियों को हटाने के लिए जिला सिंचाई विभाग को निर्देश जारी किए गए हैं।
जांच के दौरान हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) से जुड़े ठेकेदारों को भी पूछताछ के लिए बुलाए जाने की संभावना है। सरसा नदी के किनारे स्थित इस प्लांट पर आरोप हैं कि इसकी खराब व्यवस्थाओं के कारण बिना पर्याप्त उपचार के औद्योगिक कचरा नदी में पहुंच सकता है।
निरीक्षण के दौरान प्लांट में कई खामियां भी सामने आने की बात कही गई है। जांच टीम ने पाया कि कुछ महत्वपूर्ण मशीनें या तो काम नहीं कर रही थीं या उनका रखरखाव पर्याप्त तरीके से नहीं किया गया था। इसके अलावा प्लांट की चारदीवारी भी इतनी ऊंची नहीं थी कि परिसर में जमा औद्योगिक कचरे के बड़े ढेर को सुरक्षित रूप से रोक सके।
मामले की जांच अब कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। पुलिस अवैध कबाड़ कारोबार, औद्योगिक कचरे के संभावित निस्तारण और CETP की व्यवस्थाओं के बीच संबंधों की भी पड़ताल कर रही है। जांच में यदि किसी इकाई या व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।














